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नामिक के रास्ते पर गिरे पेड़, राशन का संकट

Wed, 18 May 2016 10:51 PM IST
जीवन दानू/अमर उजाला, नाचनी
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नामिक के रास्ते पर गिरे पेड़ - फोटो : अमर उजाला
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पर्वतराज हिमालय की गोदी में बसे नामिक के लोग इस समय भारी संकट में हैं। मई के प्रथम सप्ताह में नामिक के रिजर्व फारेस्ट में लगी भीषण आग से नामिक जाने वाले अश्व मार्ग पर जगह-जगह जले पेड़ गिरे हैं, जिस कारण घोड़े-खच्चर नहीं जाने से वहां राशन की किल्लत पैदा होने लगी है। लोगों को 27 किमी दूर द्वालीगाड़ से सामान सिर पर ढोना पड़ रहा है। समुद्र तल से 2700 मीटर की ऊंचाई पर नामिक और हीरामणि ग्लेशियर की तलहटी में स्थित नामिक में 122 परिवार रहते हैं। संचार सेवा नहीं होने से दिक्कतें और बढ़ रही हैं।
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नामिक के लिए थल-मुनस्यारी मार्ग के द्वालीगाड़ (बिर्थी) से अश्व मार्ग जाता है। जंगल की आग ने नामिक के लोगों के आवागमन का एकमात्र रास्ता बाधित कर दिया है। द्वालीगाड़ से तीन किमी दूरी पर चौरीपातल और 15 किमी दूर धारापानी में चार बड़े-बड़े पेड़ रास्ते पर गिरे हैं, जिससे घोड़े, खच्चरों का आवागमन बंद हो गया है। पेड़ों के निस्तारण के लिए वन महकमे और प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए हैं। थोड़ी राहत की बात यह है कि लंबे समय से बंद बागेश्वर जिले के शामा होकर गोगिना तक जाने वाला मोटर मार्ग मंगलवार को खुल गया है। गोगिना तक जाने वाली इस सड़क से नामिक की पैदल दूरी 7 किमी है।

इसके अलावा नामिक में लैंडलाइन, मोबाइल फोन सेवा उपलब्ध नहीं है। ग्राम प्रधान के घर बीएसएनएल का सेटेलाइट फोन लगा है, जो कभी भी काम नहीं करता। संचार सेवा न होने से नामिक के लोग अपनी परेशानियों की जानकारी भी समय पर नहीं दे पाते। ग्राम प्रधान तुलसी जेम्याल ने अश्व मार्ग से जल्द पेड़ों को हटाकर आवागमन शुरू करने की मांग की है।
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टेंडर के बाद भी नहीं बन रहे पुल
नामिक में सरकारी निर्माण कार्यों को कभी गंभीरता से नहीं लिया जाता। धारापानी रौली (गेधेरा) में लंबे समय से दो पुल क्षतिग्रस्त हैं। ग्राम प्रधान तुलसी जेम्याल ने बताया कि दो महीने पहले दोनों पुलों के टेंडर हो चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने पुलों का निर्माण शुरू करने के साथ ही नामिक रास्ते की मरम्मत के काम की जांच करने की मांग की है। कहा कि वर्ष 2013 की आपदा में रास्ते के मरम्मत के नाम पर गोलमाल किया गया है।
 
9 दिन से नामिक की बिजली गुल, मिट्टी तेल 100 रुपये लीटर
नामिक के लोग 9 दिन से बिजली से भी वंचित हैं। 10 मई 206 को बिजली गिरने से बिजली पावरहाउस का संयंत्र फुंक गया था। उरेडा ने गांव में ही 50 किलोवाट की परियोजना बनाई है, जिससे गांव रोशन होता है। ग्राम प्रधान ने बताया कि गांव में बिजली तो नहीं है। मिट्टी का तेल भी नामिक के 122 परिवारों को नहीं मिलता। पूर्ति विभाग नामिक से 27 किमी दूर द्वालीगाड़ में मिट्टी का तेल उतार देता है। गल्ला विक्रेताओं को भाड़ा नहीं दिया जाता। गल्ला विक्रेता मिट्टी का तेल नहीं उठाते। गांव के लोगों को ब्लैक में 100 रुपये लीटर मिट्टी का तेल खरीदना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान ने बताया उरेडा को बिजली परियोजना बंद होने की सूचना दे दी गई है।
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