चौदांस घाटी के जयकोट गांव में खेतों को बंजर होने से अब गुलाब बचा रहा है। जंगली जानवरों से फसल के न बचने से परेशान लोगों ने खेती छोड़ने का लगभग मन ही बना लिया था। ऐसे में गुलाब की खेती गांव के लिए एक नई राह सुझाने वाली साबित हुई। गांव के लोग अब गुलाब जल बनाने का एक प्लांट तक लगा चुके हैं। माना जा रहा है कि वह समय भी दूर नहीं होगा जब इस गांव को गुलाब गांव के रूप से जाना जाएगा। हाल यह है कि कभी यह गांव पैसों के लिए तरसता था, अब गांव में लोग खुद ही पहुंचकर 200 रुपये में एक लीटर गुलाब जल खरीद रहे हैं।
धारचूला से 35 किलोमीटर दूर चौदांस घाटी के जयकोट गांव में फसलों पर जंगली जानवरों का प्रकोप इतना बढ़ा कि लोगाें ने खेती छोड़ने का मन ही बना लिया था। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सोहन लाल के मुताबिक प्रधान चंद्र सिंह बड़ाल के विशेष प्रयास से एक माह पहले गांव के कुछ लोगों ने गुलाब जल संवर्धन का देहरादून में प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद गांव के महेंद्र सिंह जोशाल और रूकम सिंह बुढ़ाथोकी ने गांव में राज्य सरकार के सहयोग से गुलाब जल प्लांट लगाया। इससे शुद्ध गुलाब जल प्राप्त होने लगा। इसकी जानकारी मिलने पर सेलाकुई देहरादून से गुलाब जल विकास कार्य में लगे केबी जोशी के साथ आई टीम जयकोट गांव का दौरा किया।
श्री जोशी ने कहा कि जयकोट में तैयार होने वाला गुलाब जल 83 प्रतिशत से 89 प्रतिशत तक शुद्ध है। जो काफी स्तरीय है। प्लांट कार्य में लगे रूकम सिंह और दलीप जोशाल ने बताया कि वैसे तो गुलाब जल रोजा सेंटीफोलिया से तैयार किया जाता है मगर पहाड़ी क्षेत्रों के वातावरण के अनुसार टर्की से आयातित दमिस्क गुलाब ( रोजा दामासेना) पहाड़ी क्षेत्र के लिए बेहद उपयुक्त साबित हो रहा है। वर्तमान में प्लांट से प्राप्त गुलाब जल वातरोग में बेहद कारगर है। गांव में ही लोग 200 रुपये लीटर तक हाथोंहाथ खरीद रहे हैं। खंड विकास अधिकारी कविंद्र सिंह रावत ने कहा कि जयकोट में गुलाब जल का सफल प्लांट लगने से अब पूरे चौदांस क्षेत्र में गुलाब जल प्लांट के माध्यम से रोजगार के दरवाजे खुलने की उम्मीद है। इस नए प्रयोग से लोग खासे उत्साहित हैं। ब्लॉक प्रमुख नेत्र कुंवर ने कहा कि अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रकार के प्रयास किए जाएंगे।