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पति को नहीं पता उजड़ चुकी दुनिया: पहले बेटी को खोया, अब बेटे की मौत ने तोड़ दिया मां को; नदी में कूदकर दी जान

Sat, 19 Sep 2026 09:17 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

मड़ेगांव निवासी पूनम जोशी ने छह साल पहले कोरोनाकाल में 12 साल की बेटी को खोया था। अब बेटा जतिन भी असमय चल बसा। पहले बेटी और फिर बेटे की मौत का सदमा पूनम सहन नहीं कर सकी और उसने खुद भी दुनिया से अलविदा कह दिया।
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मां पूनम जोशी और बेटा जतिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नियति कैसे रंग दिखाएगी यह कोई नहीं जानता। मड़ेगांव के हंसते-खेलते पूनम जोशी और कैलाश चंद्र जोशी के परिवार के साथ भी ऐसा ही हुआ है। पूनम ने करीब छह साल पहले कोरोनाकाल में 12 साल की बेटी को खोया। वह और उनके पति कभी न भूलने वाले इस दुख से उबरने की कोशिश कर रहे थे।

अचानक बेटा जतिन भी असमय काल के गाल में समा गया, जिस मां ने सुबह के समय जल्द लौटने की बात कर बेटे को खेलने भेजा था उसे यह मालूम नहीं था कि अब वह कभी घर वापस नहीं आएगा।

मां नाश्ता बनाकर बेटे का इंतजार करती रही लेकिन घर पहुंचने से पहले ही रास्ते पर उसकी मौत हो गई। पहले बेटी तो फिर बेटे की मौत के इस गहरे सदमे को पूनम सहन नहीं कर सकी। उसने इस भयानक दुख को सहने के बजाय खुद ही दुनिया से अलविदा कहना उचित समझा।

वह पति कैलाश चंद्र जोशी को मझधार में छोड़कर हमेशा के लिए दुनिया छोड़कर चली गई। घर पर मां-बेटा एक-दूसरे का सहारा बनकर जीवन बिता रहे थे। अब दोनों एक-साथ दुनिया से अलविदा हुए हैं और दोनों की चिताएं भी साथ जलेंगी।

पत्नी की मौत से पति अब भी अनजान

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असम राइफल के जवान त्रिपुरा में तैनात कैलाश चंद्र जोशी को भी मालूम नहीं था कि उनके घर में ऐसी घटना घटेगी जो भयानक दर्द बनकर उनके साथ आजीवन रहेगी। एक भयानक घटना में बेटा भी चल बसा और पत्नी ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। जानकारी के मुताबिक, कैलाश को बेटे की मौत की सूचना दी गई है। पत्नी की मौत से वह अब भी अनजान हैं। बेटे के जाने के बाद पत्नी का भी हमेशा के लिए साथ छूटने की घटना की जानकारी मिलने से उनका क्या हाल होगा सबको इसकी चिंता है। पत्नी और बेटे के शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए कैलाश का इंतजार चल रहा है।

बड़ी बेटी करती है मध्य प्रदेश में नौकरी
कैलाश चंद्र जोशी दो बेटी और एक बेटे के पिता थे। बड़ी बेटी निशा पंतनगर विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद मध्य प्रदेश में नौकरी करती है। उसकी छोटी बहन चार साल पहले उसे हमेशा के लिए छोड़कर चली गई। अब भाई के बाद मां ने भी दुनिया से अलविदा कह दिया। इस घटना से निशा भी पूरी तरह टूट चुकी है। अब उसके सामने पिता को संभालने की भी जिम्मेदारी आ गई है।

 

बेहद धार्मिक थीं पूनम

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ग्रामीणों के मुताबिक, पूनम धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। कहीं पर भजन होते थे तो वह अपनी भजन गायकी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थीं। ऐसे में उनकी मौत पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, पूनम ने घाट के पास टैक्सी से उतरकर पहले अपना फोन नदी में फेंका। आसपास के लोग कुछ समझ पाते या उसके सदमे का पता लगा पाते इससे पहले कि उसने नदी में छलांग लगा दी।

तनाव से बच्चों में घर कर रही है दिल की बीमारी
आम तौर पर हार्ट अटैक का खतरा 40 वर्ष की उम्र के बाद अधिक रहता है। वर्तमान दौर में हालात चिंताजनक हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, वर्तमान दौर में कम उम्र के बच्चों में भी दिल की बीमारी घर कर रही है। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि कम उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक या दिल की अन्य बीमारी का कारण अनियोजित जीवनशैली और तनाव है। बच्चे खेलकूद से दूर होते जा रहे हैं। फास्ट फूड का अधिक सेवन उनके शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। बच्चों में पढ़ाई का तनाव भी कम नहीं है। ऐसे में बच्चे भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं।

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