जिस तरह बागेश्वर के बागनाथ मंदिर परिसर स्थित एतिहासिक सूर्य मंदिर एक ओर झुकने लगा है उसी तरह चौबाटी कस्बे से करीब दो किलोमीटर दूर मड़ गांव में स्थित सूर्य मंदिर का एक हिस्सा पूरब की ओर झुक गया है। मंदिर हर साल इसी तरह झुकता जा रहा है, जिससे मुख्य मंदिर को खतरा उत्पन्न हो गया है, इसे देखते हुए ग्रामीणों ने कुछ वर्ष पूर्व मंदिर से सटाकर एक धर्मशाला का निर्माण भी किया था, लेकिन मंदिर का खतरा इससे कम नहीं हुआ है।
दसवीं सदी में बने इस मंदिर की निर्माण शैली कत्यूरी काल में बने मंदिरों जैसी ही है। मंदिर में भगवान सूर्य की मूर्ति लगी है। गांव के लोग खास पर्वों पर मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। पौष माह में लगभग रोज ही मंदिर में पूजा होती है।मड़ गांव के लोगों का कहना है कि करीब तीन वर्ष पूर्व मंदिर पूरब दिशा की ओर झुकने लगा था। धीरे-धीरे यह झुकाव बढ़ता जा रहा है।
लोगों ने खतरे को भांपते हुए पुरातत्व विभाग को भी इसकी जानकारी दी, क्योंकि मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। एक बार पुरातत्व विभाग की टीम ने सर्वे भी किया था, लेकिन बाद में टीम ने इसकी सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए। गांववालों ने अपनी समझ से मंदिर की सुरक्षा के लिए धर्मशाला का निर्माण तो किया, लेकिन इससे भी मंदिर की सुरक्षा हो पाना संभव नहीं है।
मंदिर की सुरक्षा के उपाय होंगे
प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सीएस चौहान का कहना है कि कभी-कभी जमीन का अंदरूनी हिस्सा खुद ही धंसने लगता है। इससे उसके ऊपरी हिस्से पर बने ढांचे में असर पड़ता है। मड़ के सूर्य मंदिर के साथ भी ऐसा ही हुआ है। उन्होंने जानकारी दी कि कुमाऊं मंडल में सभी मंदिरों का सर्वे किया जा रहा है, जिन मंदिरों को खतरा हो रहा है उनमें सुरक्षा के उपाय करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। मड़ का सूर्य मंदिर भी उसमें शामिल है। जल्दी ही यह काम शुरू कर दिया जाएगा।
लोहे के एंगल डालकर होगी सुरक्षा
यदि कोई मंदिर झुकने लगता है तो उसकी सुरक्षा के लिए पहले जमीन के अंदर लोहे के एंगल डाले जाते हैं। फिर धीरे-धीरे मंदिर को ऊपर उठाने का प्रयास किया जाता है। यह काम वैसे काफी कठिन है लेकिन आर्किटैक्ट की मदद से यह संभव हो जाता है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सीएस चौहान का कहना है कि मड़ सूर्य मंदिर की सुरक्षा के लिए भी यही कदम उठाया जाएगा।