तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त समाजसेवी लीला बनग्याल ने एक अनाथ लड़की का दो साल तक पालन-पोषण कर एक अच्छे घर में उसका विवाह कराया है। लीला के इस काम की सभी ने सराहना की।
15 साल पहले धारचूला के निगालपानी (गलाती) निवासी चित्रा जब 3 साल की थी तब उसके सिर से पिता का साया उठ गया। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि चित्रा की मां ने दूसरी शादी कर ली, जिससे चित्रा अनाथ हो गई। शुरुआत में चित्रा को उसकी नानी ने पाला। जब वह कुछ बड़ी हुई तो दिल्ली में किसी के साथ रहने लगी। दो साल पहले वर्ष 2014 में चित्रा दिल्ली से भागकर जौलजीबी आ गई। उसका कहना था कि दिल्ली में उसके साथ मारपीट की जाती है। चित्रा की व्यथा सुनकर समाजसेवी लीला बनग्याल ने चित्रा की मां गीता देवी के सामने चित्रा को पालने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद चित्रा लीला के साथ रहने लगी।
लीला बनग्याल ने बताया कि 16 साल की चित्रा को पढ़ना, लिखना नहीं आता था। वह उसे घर में पढ़ाने लगी। चित्रा को घर पर ही दन, स्वेटर बनाना सिखाया। उसका प्राथमिक पाठशाला दातू में एडमिशन कराया। शिक्षिका तुलसी देवी ने चित्रा को पढ़ाने में काफी रुचि दिखाई। स्कूल से चित्रा ने कक्षा पांच पास कर लिया। अब जब चित्रा नगन्याल 18 साल की हुई तो उसके विवाह की चिंता लीला को सताने लगी। विगत दिनों धारचूला के चौंदास घाटी के मूल निवासी वीरेंद्र थापा से चित्रा की विवाह की बात चली। दोनों के एक-दूसरे को पसंद किया। वीरेंद्र का नागपुर (महाराष्ट्र) में मकान है। वह वहां एक फैक्ट्री में कार्यरत है। लीला ने कालिका में रहने वाली चित्रा की मां गीता देवी से वार्ता की। उसने भी शादी के लिए हामी भर दी। बात कन्यादान की आई तो चित्रा ने लीला बनग्याल के हाथों ही कन्यादान कराने की मंशा जाहिर की। बुधवार को जौलजीबी में समारोह पूर्वक दोनों का विवाह हो गया। विवाह में चित्रा की मां गीता देवी भी शामिल हुई। बता दें कि लीला पहले भी एक परिवार को टूटने से बचा चुकी है।