दिनेश अवस्थी
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में पूर्व में लाल धान की उन्नत खेती होती थी। बाद में परंपरागत बीज हाशिए पर जाने से किसानों से लाल धान से किनारा कर लिया। अब वर्षों बाद एक बार फिर से सीमांत के खेत लाल धान की खेती से लहलहाएंगे। इसके लिए कृषि विभाग आत्मा परियोजना के तहत किसानों को बीज उपलब्ध करा रहा है।
पिथौरागढ़ जिले में करीब 19 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होती है। बीते वर्षों में सीमांत क्षेत्रों में लाल धान की खेती करीब बंद हो चुकी थी जबकि पूर्व में लाल धान की खेती काफी होती थी। अब कई गुणों से युक्त लाल धान की खेती को पुन: उत्पादन करने का खाका खींचा गया है। इस बार कृषि विभाग ने उत्तरकाशी के पुरोला से 2.80 क्विंटल बीज मंगाया है। मुख्य कृषि अधिकारी रितु टम्टा ने बताया कि जिले के छह ब्लॉकों में 14 हेक्टेयर में लाल धान की बुवाई कर रोपाई की जाएगी।
करीब 120 किसान अपने खेतों में लाल धान की खेती करेंगे। बिण के जजुराली, भट्टयूड़ा में 2.8 हेक्टेयर, मूनाकोट के बलतड़ी, लेलू में 3.2, कनालीछीना के मुवानी, डीडीहाट के बलतिर, विनायक, रानीखेत, बेड़ीनाग के भट्टी गांव और गंगोलीहाट के बांसपठान, चौना, सिरौली में दो-दो हेक्टेयर में लाल धान की रोपाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि 85 रुपये किलो बीज को किसानों को निशुल्क उपलब्ध कराया गया है। संवाद
स्वास्थ्यवर्द्धक है लाल चावल
पिथौरागढ़। लाल चावल में पोषक तत्व एंथोसायनिन है जो कि स्वास्थ्यवर्द्धक माना जाता है। इससे चावल का रंग गहरा लाल होता है। लाल चावल में रक्तचाप कम करने, मधुमेह रोकने समेत अन्य कई गुण होते हैं। इसमें फाइबर, विटामिन बी 1, बी 2, कैल्शियम और लोह तत्व भरपूर होते हैं। बीते सालों में पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाले चावल की डिमांड भी बढ़ी है। ऐसे में माना जा रहा है कि लाल धान का भी अच्छा मूल्य किसानों को मिल सकेगा। संवाद
बलुवाकोट में हो रही काले धान की खेती
पिथौरागढ़। धारचूला ब्लॉक के बलुवाकोट में चार हेक्टेयर में काले धान की खेती की जा रही है। पिछले साल यहां मध्य प्रदेश से दो किलो बीज मंगाकर बुवाई की गई। इसके नतीजे अच्छे रहे। इसे देखते हुए इस साल चार हेक्टेयर में काले धान की बुवाई की जा रही है। कृषि विभाग ने किसानों को बीज उपलब्ध करा दिया है। संवाद