चौंनीपातल के पास पाले की दृष्टि से संवेदनशील स्थान
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जिले की कई सड़कों पर अब पाला गिरने का खतरा मंडराने लगा है। तापमान में ज्यादा गिरावट आते ही पाला गिरने लगता है। पाले में वाहनों के रपटने का खतरा रहता है। लोक निर्माण विभाग और सीमा सड़क संगठन की ओर से ऐसे स्थानों पर चेतावनी के बोर्ड तक नहीं लगाए जाते।
पिथौरागढ़-टनकपुर एनएच पर थरकोट, गुरना के पास जमकर पाला गिरता है। गंगोलीहाट-बेड़ीनाग सड़क पर बालाकूंचा, कफराड़ी, नौतस घाटी, जाड़पानी में भी सर्दियों में पाला गिरता है। बेड़ीनाग-बागेश्वर सड़क पर चौकोड़ी से आगे कोटमन्या से लेकर कमेड़ीदेवी तक पाला गिरता है। पिथौरागढ़-धारचूला सड़क पर सतगढ़, नैनीपातल, कनालीछीना में पाले से खतरा रहता है। थल-मुनस्यारी सड़क पाले की दृष्टि से सबसे ज्यादा संवेदनशील है। इस सड़क पर रातापानी से लेकर गिनीबैंड, कालामुनि, बेटुलीधार में तापमान गिरने के साथ ही पाला गिरने लगता है।
यदि सड़क पर हिमपात हो गया तो पाला जमने के बाद वह कई दिनों तक पिघलता नहीं। इससे वाहन संचालन में भारी खतरा रहता है। थल-बेड़ीनाग सड़क पर चौंनीपातल के पास लगातार रिसने वाला पानी जाड़ों में जमने लगता है। इससे वाहनों के लिए खतरा पैदा हो जाता है। इसी तरह डीडीहाट-थल सड़क पर सानदेव से घोरपट्टा तक का इलाका पाले की दृष्टि से संवेदनशील है।
लोनिवि डीडीहाट के अधीन पालाग्रस्त सड़कों की संख्या अधिक है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता जीडी जोशी ने बताया कि इस बार पाला गिरने से पहले ही ऐसे स्थानों पर चूना डाल दिया जाएगा। चूने से पाला जल्दी पिघल जाता है और वाहनों के रपटने का खतरा भी कम रहता है। उन्होंने कहा कि ज्यादा संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाएंगे।