थल से लेजम के लिए वर्ष 2001 में सड़क तो बना दी गई, लेकिन बीच में पड़ने वाले गधेरे में 17 साल बाद भी पुल नहीं बनाया गया। गधेरे से वाहन संचालन होता है, लेकिन बरसात में तीन महीने जून से अगस्त तक सड़क पर यातायात बाधित रहता है। इतनी लंबी अवधि बीतने के बाद भी सड़क कच्ची ही है।
लेजम, गोल, भनारकोट, खितोली, चामी, कौली, शौकियाथल, आमथल, गडेरापंत, घंघोली, सुनेती, दड़मोली, कमद गांव को जोड़ने के लिए वर्ष 1999 में थल से लेजम के लिए चार किमी सड़क स्वीकृत हुई। वर्ष 2001 में सड़क बन गई। लेजम से एक किमी पहले लकड़ीगाड़ में पुल बनना था, लेकिन बजट न होने के कारण पुल नहीं बना। 2017 में पुल के लिए 25 लाख रुपये का बजट मिला, लेकिन दोनों ओर की दीवार बनाकर पुल का काम बंद कर दिया गया। विभाग का कहना है कि इस काम में 25 लाख रुपये की रकम खर्च हो गई। वाहनों का संचालन लकड़ीगाड़ से किया जाता है, बरसात में गाड़ में पानी बढ़ने से वाहनों का संचालन नहीं होता है। बरसात में लकड़ीगाड़ तक की सड़क भी कीचड़ से सन जाती है।
हालांकि, 30 दिसंबर 2017 को जिले के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल के सामने लोगों ने सड़क की दुर्दशा का मामला उठाया। मंत्री ने 15 दिन के भीतर सड़क पर डामरीकरण और सुधारीकरण करने के निर्देश दिए थे, लेकिन मंत्री के आदेश पर कोई अमल नहीं हुआ। पूर्व प्रधान विनोद पंत का कहना है कि सड़क की पूरी जांच होनी चाहिए, पुल बनना चाहिए, डामरीकरण होना चाहिए और लोगों को सड़क का लाभ मिलना चाहिए।
पुल निर्माण के लिए 25 लाख ही मिले थे, जो खर्च हो गए। पुल के लिए 35 लाख का प्रस्ताव शासन को गया है। डामरीकरण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
-एमसी पांडे, अधिशासी अभियंता लोनिवि डीडीहाट