चंपावत। लोहाघाट डिपो में बसों की कमी का सीधा असर अब जनता की जेब पर पड़ने लगा है। नई बसें न होने से कानपुर, चंडीगढ़, बरेली, काशीपुर, सिमलखेत जैसे महत्वपूर्ण व ग्रामीण रूट लंबे समय से बंद पड़े हैं। सरकारी बसें न चलने के कारण बेबस यात्री निजी टैक्सियों में दोगुना-तिगुना किराया देकर सफर तय करने को विवश हैं। बंद रूटों पर सेवा बहाल करने के लिए लोहाघाट डिपो को कम से कम 14 नई बसों की आवश्यकता है।
लोहाघाट डिपो के बेड़े में एक दशक पहले तक करीब 40 से अधिक बसें शामिल थीं, लेकिन समय के साथ बसों की संख्या बढ़ने के बजाय लगातार कम होती गई। वर्तमान में डिपो के पास केवल 27 बस रह गई हैं। बसों की कमी के कारण कई ग्रामीण मार्गों पर बस सेवाओं का संचालन बंद करना पड़ा है। स्थानीय लोगों ने बस सेवा बहाल करने की मांग की है।
वहीं, डिपो प्रशासन का कहना है कि बसों की संख्या कम होने के कारण बंद पड़े मार्गों पर फिलहाल संचालन शुरू करना संभव नहीं है। बीते दिनों मुख्यालय की ओर से डिपो से बंद पड़े मार्गों के साथ अन्य आवश्यक रूटों पर बस सेवा संचालन के लिए बसों की आवश्यकता का प्रस्ताव मांगा गया है। डिपो प्रशासन जल्द ही कम से कम 14 नई बसों की मांग का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजेगा। इसके बाद नई बसें मिलते ही यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बंद मार्गों पर बस सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
खटारा श्रेणी में पहुंचे चार बसें टनकपुर वर्कशॉप में जमा
लोहाघाट डिपो के बेड़े में बीते जून माह तक कुल 31 बसें शामिल थीं। इनमें से चार बसें अपनी निर्धारित आयु पूरी कर खटारा श्रेणी में पहुंच गई थीं, जिन्हें टनकपुर वर्कशॉप में जमा करा दिया गया है। इसके बाद डिपो के पास संचालन के लिए वर्तमान में केवल 27 बसें ही शेष बची हैं। बसों की संख्या में आई इस कमी के कारण डिपो कई महत्वपूर्ण और ग्रामीण मार्गों पर बस सेवाओं का संचालन करने में असमर्थ है। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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डिपो में बसों की कमी बनी हुई है। इसके चलते पूर्व में संचालित कई मार्गों पर बस सेवाएं बंद करनी पड़ी हैं। जल्द ही कम से कम 14 नई बसों की मांग का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जाएगा। नई बसें मिलने के बाद बंद पड़े मार्गों पर फिर से बसों का संचालन शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
-धीरज वर्मा, एआरएम, लोहाघाट डिपो