धारचूला (पिथौरागढ़)। पहाड़ों में जब रास्ते थम जाते हैं तो जिंदगी भी ठहर जाती है। टनकपुर-तवाघाट एनएच बंद होने से तल्ला दारमा और चौंदास घाटी के लोग इसी बेबसी से जूझ रहे हैं। यहां बीमार अपने घरों में दर्द से तड़प रहे हैं और परिजन बेबस होकर सिर्फ आसमान की ओर ताक रहे हैं। सबके मन में यही बात है कि कब बादल छंटेंगे और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने का कोई रास्ता खुलेगा।
टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजगार्ग ऐलागाड़ के पास बोल्डर गिरने से पांच दिन से पूरी तरह बंद है। यह चीन सीमा के साथ ही दारमा, व्यास और चौंदास घाटी को जोड़ता है। इस आपदा का सबसे अधिक खामियाजा उन सात बीमारों को भुगतना पड़ रहा है जो गंभीर हालत में इलाज का इंतजार कर रहे हैं। तल्ला दारमा की हरुली देवी, गर्गुवा की धनमाया देवी, जुम्मा की असौजी देवी, तीजम की प्रेमा, सुवा के सोहन सिंह, खेला के पदम सिंह और चौंदास घाटी के धारपांगू निवासी सरस्वत कुमार दर्द से कराहते हुए घरों में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं।
इन मरीजों के घरों में दवा से ज्यादा आंसू हैं और इलाज की जगह उम्मीदें। परिजन दिन-रात प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। रास्ता बंद और मौसम खराब होने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि अपनों को पीड़ा में देखकर भी लोग सिर्फ आसमान ताक रहे हैं। इनके घरों में इंतजार, चिंता और दर्द का डेरा बना हुआ है।
मौसम के आगे पूरा सिस्टस बेबस
हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू की मांग की गई है। अधिकारी भी तैयार हो गए हैं। अब लगातार बरसते आसमान ने जिद पकड़ ली है। लगातार बारिश और तेज हवाएं राहत पहुंचाने में रोड़ा बन गई हैं। मौसम के आगे पूरा सिस्टस बेबस है। प्रशासन का कहना है कि सड़क खोलने के प्रयास जारी हैं। इस बीच जैसे ही मौसम साफ होगा हेली एंबुलेंस के जरिए सभी बीमारों को अस्पताल पहुंचाया जाएगा।
कोट
मौसम खराब खुलते ही सभी बीमारों को हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया जाएगा। सड़क खोलने के भी प्रयास जारी हैं। - जितेंद्र वर्मा, एसडीएम