हिमालयन साइकिलिंग क्लब के सदस्यों को सेरा से मदकोट के बीच बेहद कठिन दौर से गुजरना पड़ा। सेरा से आगे करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर फगुवा के पास पहाड़ी से निकलने वाले झरने का पानी थोड़ा सा रोड में गिरता है और कुछ हिस्सा सीधे गोरी में मिलता है। यहां से साइकिल से पार होने में काफी अड़चनें आ गई। सेरा से आगे मदकोट होते हुए मुनस्यारी तक का यह सफर बेहद रोमांचित करने वाला रहा। क्लब के सदस्य शनिवार की रात पिथौरागढ़ से 80 किलोमीटर का सफर तय कर सेरा पहुंच गए थे। आज सुबह साइकिल सवारों ने सेरा से आगे का सफर शुरू किया और शाम को यह लोग मुनस्यारी पहुंच गए।
क्लब के सदस्य सुरेंद्र पंवार ने बताया कि जौलजीबी से मुनस्यारी तक की सड़क में 2013 की आपदा के निशान अभी भी मौजूद हैं। हालांकि इस सड़क की मरम्मत का काम चल रहा है लेकिन कई स्थानों पर गड्ढे बने हैं। इन गड्ढों में साइकिल चलाना जोखिम का काम है। आज भी इन लोगों ने करीब 95 किलोमीटर का सफर तय किया। सोमवार को अभियान दल के सदस्य मुनस्यारी से डीडीहाट तक 100 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। अभियान में इमरान हुसैन, वीरेंद्र दरियाल, बासु पांडे, चंद्रमोहन पांडे, जगदीश भट्ट और ललित पंत भी शामिल हैं। इमरान हुसैन ने बताया कि जौलजीबी से आगे मदकोट की तरफ जाते समय गोरी का घाटी क्षेत्र बेहद रमणीक लगता है। सड़क नदी से सटकर निकलती है। गोरी का कलकल खूब आनंदित करता है।