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पिथौरागढ़ जिले के अस्पतालों में रोगियों को नहीं मिल रही हैं सुविधाएं

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अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोचर में रोगियों की जांच करती महिला चिकित्सक। संवाद न्यूज ए - फोटो : PITHORAGARH
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थल/कनालीछीना। स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पिथौरागढ़ जिले के दूरस्थ गांवों तक अस्पताल तो खोल दिए गए हैं लेकिन इन अस्पतालों में न तो विशेषज्ञ चिकित्सक हैं और न ही संसाधन। ऐसे में अधिकतर मामलों में यह केंद्र केवल रेफरल सेंटर भर बनकर रह गए हैं। पीएचसी में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड आदि की व्यवस्था न होने से मजबूरन लोगों को जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने मंगलवार को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) गौचर और कनालीछीना अस्पताल की पड़ताल की।
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सुबह 10 बजे
टीम सुबह 10 बजे पीएचसी कनालीछीना पहुंची। यहां अस्पताल में सुनसानी छाई थी। अस्पताल स्टाफ समय पर पहुंच गया था। ओपीडी कक्ष में सुनसानी थी। टीम प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रविशंकर कक्ष में पहुंची। वह कक्ष में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में रोज 10 से 15 ओपीडी होती है। एक या दो प्रसव के केस आते हैं। उन्होंने बताया कि यहां एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड आदि जांचों की व्यवस्था नहीं है।
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोचर प्लास्टर की सुविधा तक नहीं
थल (पिथौरागढ़)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) गोचर में संवाद न्यूज एजेंसी की टीम सुबह 10 बजे पहुंची। अस्पताल में धीरे-धीरे रोगी आ रहे थे। 10:05 मिनट में तीन रोगी आए ओपीडी में पर्चा काटाने के बाद वह चिकित्सक के कमरे में पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने उनका उपचार किया।
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दोपहर 12 बजे तक यहां मात्र 25 रोगी पहुंचे जिनमें 15 महिलाएं मौजूद थे। अस्पताल में केवल प्राथमिक उपचार की ही सुविधा थी। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि आपातकालीन कक्ष में गंभीर रोगियों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
12:05 मिनट में अस्पताल में मौजूद संसाधनों की जानकारी ली जिसमें चार ऑक्सीजन सिलिंडर, रैबीज के इंजेक्शन दो, एंटी स्नेक इंजेक्शन 25, इमरजेंसी दवा का स्टॉक मौजूद था। एक्सरे की सुविधा के साथ हड्डी प्लास्टर की कोई सुविधा नहीं थी। यहां गर्भवती महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी जांच की भी सुविधा नहीं थी। जांच के नाम पर केवल खून की जांच बाहर भेजी जाती हैं उसकी रिपोर्ट तीन दिन का समय लगता है। अस्पताल में मौजूद एक पुरुष डॉक्टर और एक महिला डॉक्टर रोगियों का उपचार कर रही थी। अस्पताल में मौजूद फार्मासिस्ट एक माह पूर्व सेवानिवृत्त हो गए हैं। व्यवस्था के तहत सप्ताह में तीन दिन सानदेव के फार्मासिस्ट को संबद्ध किया गया है। छह साल पूर्व इस अस्पताल का ग्रेड-ए कर इसे एपीएचसी बनाकर तीन डॉक्टर से युक्त इस अस्पताल में अब केवल दो ही डॉक्टर के पद सृजित कर दिए हैं। सुविधा के नाम पर इसका डिमोशन कर इसे एक सीढ़ी नीचे ए ग्रेड कर और सुविधा से वंचित किया गया है।
जिले के पीएचसी में चिकित्सक तैनात किए गए हैं। कुछ केंद्रों में खून की जांच भी हो रही है। मौजूदा संसाधनों में रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। तकनीशियन मिलने पर पीएचसी में एक्सरे का संचालन भी किया जाएगा। - डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।
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