कर्णप्रयाग-अस्कोट-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग में डीडीहाट से चार किलोमीटर आगे लेकमाल नदी पर बना मोटर पुल अब गिरा, तब गिरा की हालत में पहुंच गया है। पुल में लगी रेलिंग काफी पहले टूट गई थी। पुल के बेसमेंट को नदी लगातार काट रही है। एडीबी के पास पुल की देखरेख का काम है। उसने सड़क पर तो हॉटमिक्स कर दिया लेकिन पुल की ओर झांकने की जरूरत तक नहीं समझी। 1962 में पुल का निर्माण हो गया था। तब से यह देखने की जरूरत नहीं समझी गई कि पुल की लाइफ कितनी होनी चाहिए और यह किस तरह खतरनाक हालत में पहुंचा है। पुल से एक खतरा और भी है कि रेलिंग न होने के कारण वाहनों के गिरने की आशंका रहती है। दो माह पहले स्कूटर गिरने से दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
पुल से रोजाना 200 वाहन गुजरते हैं। पुल की क्षमता इतना दबाव झेलने लायक नहीं है। बताया गया है कि शुरुआत में इन पुलों का निर्माण कम दबाव झेलने के लिए ही किया गया था। अब वाहनों की संख्या तो बढ़ गई है लेकिन पुलों की क्षमता बढ़ाने की पहल नहीं हो पाई है। ऐसी स्थिति में पुल किसी भी समय गंभीर घटना का कारण बन सकता है। यदि पुल की जल्दी मरम्मत नहीं होती तो किसी भी समय कर्णप्रयाग से तवाघाट जाने वाली इस सड़क में यातायात बंद हो सकता है।