पिछले वर्षों तक कुमौड़ में इस तरह होता था हिलजात्रा का आयोजन। फाइल फोटो
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पिथौरागढ़। कोरोना के कारण इस साल सोर घाटी की प्रसिद्ध हिलजात्रा सांकेतिक रूप से मनाई गई। लोगों ने लखिया और इकलवा बैल सहित अन्य मुखौटों की पूजा-अर्चना कर हिलजात्रा की परंपरा निभाई।
सोर घाटी के कुमौड़ की हिलजात्रा की विशेष पहचान है। शहर के कुमौड़ के मैदान में हर साल हिलजात्रा का आयोजन किया जाता है। पिछले साल तक हिलजात्रा के मुख्य पात्र लखिया का आशीर्वाद लेने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचते थे। इस साल कोरोना के भय से हिलजात्रा सांकेतिक रूप से मनाई गई।
शुक्रवार शाम चार बजे कुमौड़ के गणमान्य लोगों ने लखिया के मुखौटों की पूजा की। पंडित प्रशांत जोशी ने मंत्रोच्चार किया।
इसके बाद लखिया, गल्या और इकलवा बैल के मुखौटे सिर पर रखकर मैदान का एक चक्कर लगाकर परंपरा निभाई। इस अवसर पर नीरज महर, अभिषेक महर, गांव के बुजुर्ग कुंडल महर, राजेंद्र सिंह महर, गजेंद्र महर, शमशेर महर, कल्याण सिंह महर, मोहन सिंह महर आदि मौजूद रहे। हिलजात्रा समिति के सदस्य यशवंत महर ने बताया कि यह पहला अवसर है जब हिलजात्रा का आयोजन सांकेतिक रूप में हुआ। कोरोना के कारण लोगों में काफी मायूसी देखी गई।