कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने धारचूला के दूरस्थ खेत, तीजम, सुंगदुंग, दर, बोंगलिंग, उर्थिंग, उम्चा, सेला, चल, नागलिंग, बालिंग, सौन दुग्तु, दातू, ढाकर, तिदांग, मारछा, सीपू गांवों का दौरा किया। ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत करने के साथ ही उनसे अपना दर्द साझा किया। दर के आपदा प्रभावितों ने कहा कि आपदा की मार सहते हुए वे किसी तरह खौफ के साए में जीवन जी रहे हैं। कहा अब तक उनका विस्थापन नहीं हो सका है।
दर के ग्रामीणों ने कुमाऊं कमिश्नर रावत से कहा कि गांव में लगातार भूस्खलन हो रहा है। इससे उनमें दहशत का माहौल है। घरों में दरारें पड़ी हैं और वे खतरे के बीच इनमें रहने के लिए मजबूर हैं। कहा उनके विस्थापन की लंबे समय से बात हो रही है लेकिन इसके लिए भूमि का आवंटन नहीं हुआ है। तीजम के ग्रामीणों ने कहा कि नदी के कटाव से गांव का अस्तित्व खतरे में है। सुरक्षा के लिए नदी किनारे तटबंध बनाने जरूरी हैं। उन्होंने जूनियर हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी दूर करने की भी गुहार लगाई। बोंगलिंग के ग्रामीणों ने उनके गांव को बिजली से रोशन करने की मांग की। नागलिंग के ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव में संचार सेवा शून्य है। यूपीसीएल अब तक गांव में बिजली नहीं पहुंचा सका है। ऐसे में वे दुश्वारियां झेलते हुए गांव में रह रहे हैं। कुमाऊं कमिश्नर ने ग्रामीणों को सभी समस्याओं के समाधान का भरोसा देते हुए अधिकारियों को इनके गंभीरता से निस्तारण के निर्देश दिए। इस मौके पर डीएम विनोद गोस्वामी, सीडीओ डॉ. दीपक सैनी, एसडीएम मनजीत सिंह, परियोजना प्रबंधक आशीष पुनेठा, डीपीआरओ हरीश आर्य, बीडीओ प्रदीप बिष्ट आदि शामिल रहे।
जंगली जानवरों से लोग परेशान
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नागलिंग के ग्रामीणों ने कहा कि शीतकाल में जंगली जानवर घरों में घुसकर नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में इस समस्या से निजात दिलाने के कदम उठाने चाहिए। उन्होंने अपने गांव को वाइब्रेंट विलेज में शामिल करने की भी मांग की। बालिंग के ग्रामीणों ने गांव में पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने, होम स्टे को पर्यटन विभाग की वेबसाइट में पंजीकृत करने की मांग की।