डीडीहाट (पिथौरागढ़)। कैलाश मानसरोवर यात्रियों का पहला दल बुधवार की सुबह लिपुलेख दर्रा पार कर भारतीय क्षेत्र में आ गया है। सुबह सात बजे तिब्बत के अधिकारियों ने प्रथम दल को भारतीय क्षेत्र में छोड़ा और तीसरे दल को अपने साथ लेकर गए। प्रथम दल गुंजी में रुका है जबकि तीसरे दल के सदस्य तकलाकोट में रुके। कैलाश यात्रियों का दूसरा दल इस समय कैलाश परिक्रमा पथ पर है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस की सातवीं वाहिनी के नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार कैलास यात्रियों का पहला 54 सदस्यीय दल यात्रा पूरी कर भारत की धरती पर लौट आया है। इस दल ने बुधवार की सुबह सात बजे लिपुलेख दर्रा पार किया। कैलाश मानसरोवर यात्रियों के चौथे दल ने आज सुबह गाला से बूंदी तक का सफर पूरा किया। बृहस्पतिवार को पांचवें दल के 54 यात्री आधार शिविर धारचूला पहुंच जाएंगे। पांचवें दल के यात्री दोपहर भोजन डीडीहाट में करेंगे। उसके बाद वह आईटीबीपी वाहिनी मुख्यालय मिर्थी जाएंगे। नियंत्रण कक्ष के अनुसार सभी दलों के यात्री स्वस्थ हैं। आईटीबीपी, एसडीआरएफ के जवान यात्रियों की खतरनाक रास्तों पर मदद कर रहे हैं।
तीसरा दल छोटा कैलाश यात्रा पूरी कर लौटा
पिथौरागढ़। छोटा कैलाश की यात्रा पूरी कर तीसरा दल भी लौट आया है। 43 सदस्यों वाले इस दल में 17 महिलाएं हैं। पिथौरागढ़ के पर्यटक आवासगृह में इन यात्रियों का स्वागत हुआ। यात्रियों ने मानसरोवर वाटिका में पौधे रोपे। हिमालय बचाने और स्वच्छता की शपथ ली। यात्रियों ने बताया कि छोटा कैलाश जाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। हर स्थान पर बेहतरीन इंतजाम किए गए थे। मौसम भी सुहावना मिला। पर्यटक आवासगृह के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने यात्रियों का बुरांश का जूस पिलाकर स्वागत किया। यात्री दोपहर भोजन के बाद जागेश्वर को रवाना हो गए। केेएमवीएन के सेवानिवृत्त यात्राधिकारी देवेंद्र पांडे को सम्मानित किया गया। पांडे ने अपने सेवाकाल में यात्रा मार्ग के पड़ावों, आवासगृहों में बेहतरीन सेवाएं दी। दल के सबसे बुजुर्ग यात्री एलआर भट्टा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। छोटा कैलाश यात्रा पर इस बार 18 दलों के जाने का कार्यक्रम तय है। यात्रा दल के साथ समन्वयक प्रकाश उनियाल चल रहे हैं। उन्होंने भी यात्रा मार्ग के बारे में कई जानकारियां दी।