पिथौरागढ़ के गांधी चौक में काफल बेच रहा व्यापारी। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में इस बार काफल के फल की पैदावार कम हुई है। इस कारण यह 300 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। बावजूद इसके लोग इस रसीले फल का स्वाद ले रहे हैं।
जिले के कनालीछीना, अस्कोट, डीडीहाट, गंगोलीहाट, चौकोड़ी, पांखू आदि जगहों के जंगलों में काफल बहुतायत में होता है। इस बार मौसम की मार इस फल पर भी पड़ी है। कई जगहों पर ओलावृष्टि ने फल को काफी नुकसान पहुंचाया। इसके चलते इस बार काफल कम दिखाई दे रहा है। साथ ही इसके दाम भी बढ़े हैं। बाजार में काफल 300 रुपये किलो बिक रहा है। अच्छी बिक्री होने से कारोबारियों में भी खुशी है।
जिलेभर में रोजाना 10 क्विंटल से अधिक काफल की बिक्री हो रही है। इससे करीब 150 से अधिक किसानों को लाभ पहुंच रहा है। स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ काफल औषधीय गुणों से युक्त होता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। पेट संबंधी समस्याओं में भी इसे कारगर माना जाता है। कई जगहों पर सड़कों के किनारे बच्चे इसे पर्यटकों को बेच रहे हैं।
गांधी चौक बाजार में काफल बेच रहे गुड्डू ने बताया कि वह डीडीहाट से इसे लाकर बेच रहे हैं। अस्कोट के सिंगाली क्षेत्र के ललित मोहन ने बताया कि मौसम की मार काफल पर पड़ी है। पेड़ों पर फल कम होने से दाम बढ़ गए हैं। संवाद