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Pithoragarh News: दया की दुकान में जुगाड़ की पाठशाला

Mon, 27 Oct 2025 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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गंगोलीहाट के अनरगांव में दुकान में संचालित होता विद्यालय। संवाद
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गिरीश पंत
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावे गंगोलीहाट में धूल फांक रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय अनरगांव सिस्टम को आईना दिखाने के लिए काफी है। यहां बच्चे स्कूल की जगह किराए की दुकान में बैठकर भविष्य गढ़ रहे हैं।

यह स्कूल उपेक्षा की परतों में दबा हुआ है। दो साल पहले इसका भवन रात में भरभराकर गिर पड़ा था। शुक्र था कि हादसा दिन में नहीं हुआ, वरना यहां मासूम जानें दांव पर होतीं। हादसे के बाद भी सिस्टम की नींद नहीं टूटी। नए भवन के निर्माण की पहल तक नहीं हुई। बच्चे हफ्तों तक घरों में बैठे रहे। फिर गांव के लोगों ने खुद कदम बढ़ाए।
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अनरगांव के ही श्याम सिंह ने विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए अपनी दुकान निशुल्क विद्यालय संचालन के लिए दी। तब से यह विद्यालय इसी दुकान में चल रहा है। असल विद्यालय भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है। संवाद

एक कमरा, पांच कक्षाएं, सात विद्यार्थी, इसी में बनता है मिड डे मील

पांच कक्षाओं के सात विद्यार्थी एक ही कमरे में बैठते हैं। एक कोने में शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर पढ़ाते हैं। दूसरे कोने में भोजन माता मिड-डे मील बनाती है। न किताबों के लिए जगह है और ना ही खेलने का मैदान। सिस्टम ने जैसे मान लिया है कि गरीबों के बच्चों को पढ़ाई नहीं, केवल पाठशाला का जुगाड़ चाहिए।

बच्चों को पढ़ाने के लिए हो रहा पलायन

अभिभावक डरे हुए हैं। विद्यालय का नया भवन बनाने के लिए अब तक गंभीरता नहीं दिखाई गई है। ऐसे में कई अभिभावक बच्चों की पढ़ाई के लिए पलायन कर गए हैं। इस कारण छात्र संख्या लगातार घट रही है।

बोले ग्रामीण

- हम लंबे समय से विद्यालय भवन बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दुकान में संचालित हो रहे स्कूल को देखकर भी विभाग चुप है। - राजेंद्र सिंह बिष्ट, अनरगांव -
दुकान के एक कमरे में विद्यार्थी कैसे पढ़ेंगे। विभाग को इन सवालों का जवाब देना होगा। शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी की बातें सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। - प्रियंका देवी, बीडीसी सदस्य, अनरगांव
- विभाग और सरकार से मामले में कई बार पत्राचार किया गया। इस गंभीर मामले का संज्ञान न लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। यही कारण है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था बेहतर नहीं हो पा रही है। - मंजू देवी, अभिभावक-
गांव के बच्चे दुकान के एक कमरे में अभावों में पढ़ रहे हैं। ऐसा करना मजबूरी है। यदि यह स्कूल बंद हो गया तो विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए चार किलोमीटर दूर अन्य विद्यालय में जाना पड़ेगा। छोटे बच्चों के लिए ऐसा करना असंभव है। - भागीरथी देवी, अभिभावक

कोट

- प्राथमिक विद्यालय अनरगांव के नए भवन के लिए आगणन तैयार कर शासन को भेजा है। स्वीकृति मिलते ही भवन निर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा। - तरुण कुमार पंत, जिला शिक्षा अधिकारी, बेसिक, पिथौरागढ़
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हजारों करोड़ के बजट में अनरगांव का हिस्सा क्यों नहीं

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्तराखंड में शिक्षा, खेल और युवा कल्याण विभाग को सबसे अधिक बजट आवंटित किया गया है। यह 6,417 करोड़ रुपये से अधिक है। इस बजट के तहत, सरकारी प्राइमरी स्कूलों को 3,455 करोड़ रुपये और माध्यमिक विद्यालयों के लिए 3,864 करोड़ रुपये के राजस्व व्यय का आवंटन किया गया है। हैरत की बात है कि हजारों करोड़ का बजट जिस राज्य में शिक्षा के लिए दिया जा रहा है वहां के विद्यार्थियों के लिए दो साल बाद भी एक नया भवन नहीं बनाया जा सका।
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