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Pithoragarh News: बेस सिर्फ नाम का अस्पताल, वार्ड भी तैयार नहीं

Thu, 25 Jun 2026 11:02 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। तमाम दावों और कोशिशों के बावजूद सीमांत जिले की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को आज भी इलाज के लिए मैदानी इलाकों की दौड़ लगानी पड़ रही है। करीब तीन साल पहले लिन्ठूड़ा में 65 करोड़ रुपये की लागत से तैयार बेस अस्पताल भी जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका है।
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सितंबर से मेडिकल कॉलेज का पहला सत्र शुरू करने और उससे पहले व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के सरकारी दावे धरातल पर पूरी तरह बेअसर नजर आ रहे हैं। संवाद न्यूज एजेंसी ने इन दावों की पड़ताल की तो यह हकीकत सामने आया।
मेडिकल कॉलेज को एनएमसी की अनुमति के लिए 700 बेड का अस्पताल जरूरी है। बेस अस्पताल ही अनुमति मिलने का आधार है। यहां सिर्फ कक्ष बनाकर छोड़ दिए गए हैं। अब तक अस्पताल में वार्ड भी तैयार नहीं हो सके हैं। अधिकतर कक्ष खाली पड़े हैं तो कुछ कक्षों में अस्त-व्यस्त तरीके से चारपाई को स्टोर किया गया है। इसी बीच जिला अस्पताल में दबाव कम करने के लिए मरीजों को बेस में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। हैरानी की बात है कि अब तक वार्ड ही तैयार नहीं हैं तो मरीजों को कहां सुलाया जाएगा और मेडिकल कॉलेज एनएमसी की कसौटी पर कैसे खरा उतरेगा। संवाद
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ओटी और लैब के उपकरण नहीं
लंबे समय से बेस अस्पताल में ओटी और पैथोलॉजी लैब को अस्तित्व में लाने के दावे किए जा रहे हैं जो धरातल पर बेअसर हैं। बेस अस्पताल में ओटी के दो कक्ष तैयार कर औपचारिकता निभाई गई है। अस्पताल प्रबंधन के पास ओटी के लिए न तो सर्जन हैं और न ही जरूरी उपकरण। वहीं लैब के लिए अब तक सिर्फ कक्ष तैयार हो सका है। इसके लिए जरूरी उपकरणों की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है पैथोलॉजिस्ट सहित अन्य स्टाफ की नियुक्ति तो दूर की बात है।

फैकल्टी की राह देखते थक चुकी हैं आंखें
मेडिकल कॉलेज और इसके अधीन संचालित बेस अस्पताल में फैकल्टी के रूप में 176 विशेषज्ञों की नियुक्ति होनी है। इसमें सर्जन, फिजिशियन, महिला, बाल रोग जैसे महत्वपूर्ण विशेषज्ञ शामिल हैं। लगातार दो साल से प्रयास के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन फैकल्टी के नाम पर सिर्फ चार असिस्टेंट प्रोफेसर की ही व्यवस्था कर सका है। ऐसे में पहला बैच शुरू होने से पहले फैकल्टी और सीमांत के लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए विशेषज्ञों की तैनाती कैसे होगी यह सवाल सबको परेशान कर रहा है।

ओपीडी औसतन सिर्फ चार से छह
सीमांत के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे कर बेस अस्पताल का भवन तो खड़ा कर दिया गया लेकिन यहां स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार नहीं हो सका है। ऐसे में लोगों का इस अस्पताल से भरोसा उठने लगा है। अस्पताल का ओपीडी रजिस्टर इसे सच साबित कर रहा है। बेस में रोजाना औसतन चार से छह मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं वे भी आसपास के क्षेत्र से। यही कारण है कि जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव बढ़ गया है।


बेस अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। फैकल्टी की नियुक्ति के लिए लगातार साक्षात्कार किए जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के संचालन से पूर्व फैकल्टी की नियुक्ति के साथ ही अन्य सुविधाओं का विस्तार कर लिया जाएगा ऐसी उम्मीद है।
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