फोटो 01 पीटीएच 01 पी- धारचूला के लिपुलेख दर्रे के पास भारतीय व्यापारियों के कागजातों की जांच कर
पिथौरागढ़/धारचूला। छह साल बाद भारत-चीन व्यापार फिर से शुरू हो गया है। व्यापारियों का पहला दल धारचूला के लिपुलेख दर्रे से होते हुए तकलाकोट पहुंच चुका है। 31 जुलाई की शाम को 20 सदस्यों का यह दल गुंजी पहुंचा। यहां सभी ने इमीग्रेशन प्रक्रिया पूरी की और नाभीढांग में रात्रि विश्राम किया।
एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकली के नेतृत्व में पंजीकृत 16 व्यापारी और चार हेल्परों सहित कुल 20 सदस्य शनिवार की सुबह नाभीढांग से आईटीबीपी की सुरक्षा में व्यापारी लिपुलेख दर्रा पहुंचे। लिपुलेख दर्रे पर 10:15 बजे चीन के अधिकारियों ने आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण की। इसके बाद चीन प्रशासन की सुरक्षा में व्यापारी वाहनों से तकलाकोट मंडी पहुंचे।
एसडीएम ने बताया कि चीन प्रशासन के निर्देशानुसार प्रथम चरण में केवल पूर्व से पंजीकृत व पहले व्यापार कर चुके व्यापारियों को ही प्रवेश की अनुमति प्रदान की गई है। इस कारण व्यापारी भारत से कोई नई व्यापारिक सामग्री लेकर नहीं गए हैं।
व्यापारी तकलाकोट में पूर्व से उपलब्ध अपनी व्यापारिक सामग्री व उससे संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए व्यापार का संचालन करेंगे।
एसडीएम जोशी ने बताया कि अन्य व्यापारिक दलों के तकलाकोट प्रस्थान की तिथियों के निर्धारण के संबंध में चीन प्रशासन के साथ ई-मेल के माध्यम से नियमित समन्वय और पत्राचार किया जा रहा है। बताया कि जैसे ही अगले बैचों के लिए अनुमति व तिथियां प्राप्त होंगी, अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट मंडी भेजा जाएगा। दोनों देशों के मध्य व्यापार शुरू होने से सीमांत के व्यापारियों में काफी उत्साह है।
नाभीढांग से आगे नहीं है संचार व्यवस्था
व्यास घाटी के उच्च हिमालयी क्षेत्र नाभीढांग से आगे संचार की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते व्यापारियों का अपने परिजनों से संपर्क नहीं हो पाता है। गुंजी में भी सिग्नल काफी कम मिलते हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ ही यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। संचार सेवा न होने से व्यापारी तकलाकोट से लौटने के बाद ही वहां के हालात की जानकारी साझा कर सकेंगे। हालांकि, पहले व्यापारी पैदल ही लिपुलेख दर्रा पार करते थे। अब वहां तक सड़क बनने से काफी सुविधा हो गई है।