भारत-चीन व्यापार में अब तेजी आने से व्यापारी खुश हैं। अब तक 22 लाख 19 हजार रुपये का आयात और एक करोड़ 17 लाख, 60 हजार रुपये का सामान निर्यात हुआ है। लिपुलेख दर्रे से प्रतिवर्ष एक जून से 30 अक्तूबर तक भारत-चीन व्यापार होता है। चीन की तकलाकोट मंडी से व्यापार समिति के महासचिव दौलत सिंह रायपा ने बताया कि तकलाकोट में 23 व्यापारी और 18 हेल्पर अभी मौजूद हैं। कुछ व्यापारियों ने अपना-अपना सामान गुंजी पहुंचाना शुरू कर दिया है। व्यापारी 23 अक्तूबर से भारत आना शुरू कर देंगे।
30 अक्तूबर तक सभी व्यापारी गुंजी पहुंच जाएंगे। ट्रेड अधिकारी एवं उपजिलाधिकारी अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि सभी व्यापारियों को 30 अक्तूबर तक भारतीय सीमा में पहुंचने के निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार तक आयात 2219093 और निर्यात 11760120 रुपये का हुआ है। व्यापार समाप्त होते ही कस्टम और राजस्व कर्मचारी भी धारचूला को वापस आ जाएंगे।
मिश्री और गुड़ की चीन में ज्यादा डिमांड
भारत की मिश्री, गुड़, माचिस, स्टील के बर्तन, रंगजग (मोमो बनाने वाले बर्तन) की चीन में ज्यादा मांग है। साथ ही सस्ते कंबल, कारपेट, सिलाई मशीन, कॉस्मेटिक सामान और लाठी बेचने के लिए व्यापारी ले जाते हैं। चीन से रेडिमेड, उच्च क्वालिटी के चाइनीज कंबल, जैकेट, पश्मीना, सांवर के जूते, चंवर गाय की पूंछ, छिरबी आदि चीजों को खरीद कर भारत लाते हैं।
सड़क की अनदेखी से प्रभावित हो रहा कारोबार
63 वर्षीय व्यापारी पाल सिंह कुटियाल का कहना है कि सीमांत के लोगों का एक मात्र व्यापार भी राज्य और केंद्र सरकार की अनदेखी के कारण धीरे- धीरे कम हो रहा है। इसका मुख्य कारण नजंग से लिपुलेख सीमा तक सड़क का नहीं होना है। इसके चलते व्यापारियों को ढुलान में अधिक खर्च करना पड़ता है। गुंजी में मंडी नहीं होने से पिछले कई सालों से चीन के व्यापारी भी गुंजी नहीं आए हैं। उनका कहना है कि मुद्रा विनिमय केंद्र नहीं होने से तकलाकोट में भारतीय व्यापारी जो भी आय करते हैं, मजबूरी में उस धनराशि का सामान खरीदना पड़ता है।