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अच्छी नौकरी तो छोड़ो, मजदूरी ही मिल जाती तो धन्य हो जाते

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पिथौरागढ़। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में 60 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही है लेकिन इस लक्ष्य को सरकार कैसे पाएगी यह समझ से परे है। सेवायोजन कार्यालय से मिले आंकड़ों की बात करें तो बीते पांच सालों में पिथौरागढ़ जिले में महज 235 लोगों को ही रोजगार उपलब्ध हो पाया है। कुल पंजीकृत बेरोजगारों की बात करें तो 0.45 फीसदी के हाथों को ही काम मिल पाया है। एक साल का औसत 50 से भी कम है। बेरोजगारों का कहना है कि ठीकठाक नौकरी तो छोड़ ही दो कहीं मजदूरी भी मिल जाती तो कम से कम अपनी जरूरतों के लिए परिजनों के आगे हाथ तो नहीं फैलाने पड़ते।
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सीमांत जिले में वर्ष 2017 में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 70661 थी। 2021 में यह संख्या बढ़कर 51535 हो गई है। आंकड़ों की बात करें तो हर साल 10 हजार से अधिक युवा सेवायोजन कार्यालयों में पंजीकरण करा रहे हैं। बीते वर्ष तो यह आंकड़ा 15 हजार के भी पार चला गया था लेकिन इसमें से महज 0.47 फीसदी लोगों को ही रोजगार उपलब्ध हो पाया है।
सीमांत जिले में किसी भी सड़क से गुजरने पर हर एक या दो किलोमीटर बाद ढाबा दिखाई दे रहा है। कई पढ़े लिखे बेरोजगार युवा बैंकों से ऋण लेकर टैक्सी चला रहे हैं। टैक्सियों की संख्या भी सड़कों में इतनी बढ़ गई है कि वह बैंक किश्त तक नहीं निकाल पा रहे हैं। चुनावी मौसम में बेरोजगारी से तंग आए युवा इन दिनों राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों से रोजगार मांग रहे हैं। बेरोजगारों का कहना है कि अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए भी घर वालों के आगे हाथ फैलाने में उन्हें शर्म आ रही है। कुछ दिन प्रचार में जाकर रुपये मिल जाएंगे उस रुपये से वह अपनी जरूरतें तो पूरी कर सकते हैं।
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पिथौरागढ़ में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या
वर्ष - कुल बेरोजगार - नये पंजीकरण
2017- 70661 - 10387
2018- 54025- 11367
2019- 49710- 11035
2020- 56100- 11204
2021- 51535- 15398
अभी मैंने पिथौरागढ़ सेवायोजन कार्यालय ज्वाइन नहीं किया है। ज्वाइनिंग के आदेश मिल चुके हैं। ज्वाइनिंग के बाद असल स्थिति का पता चल पाएगा। - राजेश दुर्गापाल, सेवायोजन अधिकारी पिथौरागढ़।
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