पिथौरागढ़। सीमांत जिले के 27 आयुर्वेदिक अस्पताल लंबे समय से किराये के भवनों में संचालित हैं। हर माह सरकार आयुर्वेदिक अस्पतालों को पांच लाख रुपये का किराया दे रही है। आयुर्वेदिक अस्पतालों में चिकित्सकों और फार्मासिस्टों के पद भी लंबे समय से खाली हैं। इसके बाद भी इन पदों को भरने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोग और कई जन संगठन भी सरकार से आयुर्वेदिक अस्पतालों का भवन बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके बाद भी अस्पताल भवनों के निर्माण को लेकर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जिले में 27 आयुर्वेदिक अस्पतालों का सरकार हर माह पांच लाख रुपये किराया दे रही है। आयुर्वेदिक अस्पतालों का भवन न होने से सरकार को हर माह अच्छे राजस्व की चपत लग रही है। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में संचालित आयुर्वेदिक अस्पताल भी किराये वाले भवनों में हैं जिसका प्रतिमाह 13 हजार किराया देना पड़ रहा है। जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी कार्यालय भी वर्ष 1973 से किराये पर है। आयुर्वेदिक विभाग लंबे समय से सरकार से भवन बनाने की मांग कर रहा है। इसके बाद भी भवन निर्माण को लेकर कोई भी प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
आयुर्वेदिक अस्पतालों में चिकित्सकों के नहीं होने से लोग परेशान
पिथौरागढ़। जिले में चिकित्सा अधिकारी के 83 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 56 पद भरे और 27 पद खाली हैं। फार्मासिस्ट के 11 पद, चीफ फार्मासिस्ट के दो और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के दो पद खाली हैं। चतुर्थ श्रेणी के सात पद और कनिष्ठ लिपिक के दो पद खाली हैं।
अस्पताल भवनों के निर्माण के लिए उच्च अधिकारियों से लगातार पत्र व्यवहार किया जा रहा है। खाली पदों को भरने के लिए उच्च अधिकारियों को बताया गया है। - डॉ. चंद्रकला भैसोड़ा, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, पिथौरागढ़।