पिथौरागढ़। पांच साल बाद शुरू होने जा रही कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ ही लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार के भी शुरू होने की उम्मीद है। साल 2019 से 40 से अधिक भारतीय व्यापारियों का एक करोड़ से अधिक का सामान तिब्बत की तकलाकोट मंडी में फंसा हुआ है।
तिब्बत की तकलाकोट में व्यापारिक मंडी है। भारतीय व्यापारी लिपुलेख दर्रे से होकर इस मंडी तक पहुंचते हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान तकलाकोट मंडी में दोनों देशों के बीच करोड़ों का व्यापार होता था। वर्ष 2019 में व्यापार की अवधि खत्म होने पर भारतीय व्यापारी तकलाकोट में ही सामान छोड़कर भारत लौट आए थे। इसके बाद कोविड और भारत-चीन के खराब संबंधों के चलते वर्ष 2020 से व्यापार शुरू नहीं हो पाया। भारत-चीन व्यापार समिति के पदाधिकारियों के अनुसार तकलाकोट मंडी में लगभग 40 व्यापारियों का एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत का सामान फंसा है।
व्यापारियों ने पिछले दिनों क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा के नेतृत्व में वाणिज्य मंत्री से मुलाकात की थी, जिसमें भारत-चीन व्यापार शुरू करने के साथ ही तकलाकोट मंडी में फंसे सामान को भारत लाने के लिए अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया गया था। केंद्रीय राज्यमंत्री टम्टा ने बताया कि व्यापारियों की मांग पर उन्हें आश्वस्त किया गया है। इसको लेकर वार्ता चल रही है। शीघ्र ही इस पर उचित निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।