पिथौरागढ़ नैनीसेनी एयरपोर्ट से चिनूक हेलिकाप्टर की मदद से इस तरह पहुंचाया जा रहा है चीन सीमा पर स
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पिथौरागढ़। बीआरओ सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चीन सीमा को जाने वाली सड़क धारचूला-लिपुलेख सड़क और मुनस्यारी- मिलम सड़क का निर्माण कार्य तेज गति से कर रहा है। इसके लिए पिथौरागढ़ नैनीसैनी एयरपोर्ट से सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वालीं मशीनें चिनूक हेलिकाप्टर से भेजी जा रही हैं। बीआरओ के जवान बड़ी-बड़ी मशीनों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर चिनूक की मदद से गुंजी और मिलम सीमा तक पहुंचा रहे हैं।
बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) धारचूला से चीन सीमा से लगे लिपुलेख को सड़क कनेक्टिविटी पूरी करने के बाद अब सड़क के दूसरे चरण के कार्य युद्ध स्तर पर कर रहा है। दूसरे चरण में हॉटमिक्स, सुरक्षा दीवार, नालियां, कलवर्ट आदि का निर्माण किया जाना है। इसके लिए नैनीसैनी एयरपोर्ट से भारतीय वायुसेना के मालवाहक चिनूक हेलिकॉप्टर से आवश्यक उपकरण पहुंचाए जा रहे हैं। चिनूक की मदद से एचएमटी हॉटमिक्स प्लांट को गुंजी पहुंचाया गया है। प्लांट के काफी बड़ा होने के कारण बीआरओ के इंजीनियरों और मकैनिकों ने हॉटमिक्स प्लांट के आठ अलग-अलग हिस्से किए और फिर इन्हें क्रेन के जरिए चिनूक हेलिकाप्टर में लोड कर गुंजी पहुंचाया गया। इसके अलावा मुनस्यारी के धापा बैंड से मिलम तक बन रही सड़क के निर्माण के लिए पोकलैंड व जेसीबी मशीन सहित कई उपकरणों को भेजा जा रहा है।
गुंजी से कालापानी तक किया जाएगा हॉटमिक्स
पिथौरागढ़। बीआरओ का गुंजी एचएमटी हॉटमिक्स प्लांट पहुंचाने का मुख्य उद्देश्य गुंजी से कालापानी तक हॉटमिक्स करना है। वर्तमान में गुंजी से कालापानी तक काफी बर्फ है। यहां तापमान भी काफी कम है। बर्फ के पिघलने और हॉटमिक्स के लिए उचित तापमान मिलने के बाद हॉटमिक्स का कार्य शुरू हो पाएगा। वर्तमान में यहां सुरक्षा दीवार, नाली निर्माण आदि का कार्य किया जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है सड़क
पिथौरागढ़। धारचूला- लिपुलेख सड़क धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसी सड़क से होकर विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा और आदि कैलाश यात्रा, ओम पर्वत, व्यास गुफा, प्रसिद्ध कालापानी मंदिर देखने के लिए प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में लोग जाते हैं। धारचूला से लिपुलेख सड़क बनने के बाद चीन सीमा से सटे गांवों में पर्यटन बढ़ा है, जिससे सीमांत के लोगों की आय में भी सुधार हो रहा है।