पिथौरागढ़। सोरघाटी का सबसे अधिक रोमांचित करने वाले पर्व हिलजात्रा (मुखौटा) नृत्य का दीदार विजयपथ पर 26 जनवरी की परेड में होगा। इसके लिए आठ सदस्यों की टीम दिल्ली पहुंच गई है और अभ्यास भी शुरू कर दिया है। हिलजात्रा का इतिहास नेपाल के साथ भी जुड़ा है। यह पहला मौका होगा कि महिला नारी शक्ति थीम हिलजात्रा की प्रस्तुति देगी।
उत्तराखंड में लोक पर्व आज भी आस्था, विश्वास और रोमांच के प्रतीक है। सोरघाटी का ऐतिहासिक हिलजात्रा पर्व पिछले 500 वर्षों से मनाया जा रहा है। सातू-आंठू से विभिन्न गांवों में शुरू होने वाले इस कृषि पर्व का समापन पिथौरागढ़ में हिलजात्रा के रूप में होता है। इस अनोखे पर्व में बैल, हिरण, लखिया भूत जैसे कई पात्र मुखौटों के साथ मैदान में उतरकर नृत्य से देखने वालों को रोमांचित कर देते हैं।
इस बार गणतंत्र दिवस परेड के लिए देश भर से 1300 महिला कलाकारों को आमंत्रित किया गया है जो महिलाएं अपनी-अपनी संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियां देंगी। इनमें पिथौरागढ़ की भाव राग ताल नाट्य अकादमी की आठ महिला कलाकार भी शामिल हैं। अकादमी के निदेशक कैलाश कुमार के नेतृत्व में सिमरन दिगारी, प्रीति रावत, तनुजा गोस्वामी, आरती गड़िया, सपना, प्रिया, शीतल और कुमकुम आर्या दिल्ली पहुंच गई हैं और वहां अभ्यास भी शुरू कर दिया है।
कैलाश कुमार ने बताया कि केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली और उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के विशेष सहयोग से महिला टीम हिलजात्रा की प्रस्तुति देगी। इधर स्थानीय लोगों का कहना है कि विजयपथ पर हिलजात्रा का मंचन पिथौरागढ़ जिले को विशेष पहचान दिलाएगा। संवाद
हिरन-चीतल की देंगे प्रस्तुति
पिथौरागढ़। भाव राग ताल नाट्य अकादमी की महिला कलाकार हिरन-चीतल, बैलों की जोड़ी, मां महकाली, एकलवा बैल और लाटा-लाटी का किरदार निभाते हुए प्रस्तुति देंगी। वर्ष 2023 में पिथौरागढ़ के छलिया नर्तकाें के दल ने भी गणतंत्र दिवस परेड में प्रस्तुति दी थी। संवाद
जिले कई गांवों में मनाया जाता है हिलजात्रा
पिथौरागढ़। जिले के कुमौड़, बजेटी, सतगढ़, सिरोली, कनालीछीना, डुंगरी, भाटीगांव सहित कई इलाकों में हिलजात्रा पर्व मनाया जाता है। भाव राग ताल नाट्य अकादमी लंबे समय से हिलजात्रा के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। वह पलायन से खाली गांवों में जाकर दोबारा लोगों को हिलजात्रा मंचन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। संवाद