शमशाद पिथौरागढ़ी को नेशनल बुक ऑफ रिकार्ड से सम्मानित करते ओएमजी के संस्थापक।
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पिथौरागढ़। पिछले 27 वर्षों से उत्तराखंड संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे शमशाद पिथौरागढ़ी की हिलजात्रा पेंटिंग नेशनल बुक ऑफ रिकार्ड में शामिल हुई है। उत्तराखंडी सांस्कृतिक चित्रकार शमशाद के नाम यह रिकॉर्ड सातू-आठू के दौरान मनाए जाने वाले हिलजात्रा पर्व पर पेंटिंगों की शृंखला बनाने के लिए दर्ज किया गया है।
29 सितंबर को मुंबई से लखनऊ आए नेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड ओएमजी के संस्थापक डॉ. दिनेश गुप्ता ने शमशाद पिथौरागढ़ी को इस रिकॉर्ड के लिए सर्टिफिकेट और मेडल देकर सम्मानित किया। बता दें कि शमशाद बीते 27 वर्षों से लगातार उत्तराखंड की संस्कृति पर कार्य कर रहे हैं। शमशाद की सफलता से खुशी का माहौल है।
27 सालों से कुमाऊंनी संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं शमशाद
पिथौरागढ़। शमशाद पिथौरागढ़ी पिछले 27 वर्षों से कुमाऊंनी संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्हें इस कार्य के लिए बसंतोत्सव नोयछा, लखनऊ में हिमालयन सम्मान, नवोदय पर्वतीय कला केंद्र और गीत गंगा स्टूडियो पुरस्कार देकर सम्मानित कर चुका है। शमशाद पिथौरागढ़ कुमाऊंनी गानों की रचना भी करते हैं।
रक्षा मंत्री को भी दे चुके हैं पेंटिंग
पिथौरागढ़। शमशाद पिथौरागढ़ी का नाम नेशनल बुक ऑफ रिकार्ड में इसलिए शामिल किया गया है कि हिलजात्रा में बनाए जाने वाले लखियाभूत, हिरन चित, लाटा, लाटी आदि अन्य किरदारों की पेंटिंग आज तक उनके अलावा किसी ने नहीं बनाई है। वह अपनी हिलजात्रा पेंटिंग और ऐपण को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई लोगों को दे चुके हैं।