सरकार और शिक्षा विभाग ने कोटाखड़िक क्षेत्र के लोगों के साथ मजाक कर दिया है। 2014 में कोटाखड़िक में शिक्षकों के पद सृजित कर राजकीय हाईस्कूल खोल दिया। अब तक बिना शिक्षकों के संचालित हो रहे इस विद्यालय में सरकार और विभाग शिक्षकों की तैनाती तो नहीं कर पाया, लेकिन विद्यालय में पढ़ रहे 32 विद्यार्थियों को आठ किलोमीटर दूर जीआईसी कोटापंद्रपाला जाने के आदेश दे दिए हैं। कोटाखड़िक हाईस्कूल को बंद कर दिया गया है।
यह विडंबना मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र की है। बताया गया कि कोटाखड़िक में 2006 में जूनियर हाईस्कूल खोला गया था। पांच साल तक इस जूनियर हाईस्कूल में विभाग स्थायी तौर पर शिक्षकों की तैनाती नहीं कर पाया। अस्थायी व्यवस्था में चल रहे इस जूनियर हाईस्कूल की दशा सुधारने के बजाए 2014 में बच्चों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ हो गया। सरकार ने बिना पद सृजित किए कोटाखड़िक जूनियर हाईस्कूल को राजकीय हाईस्कूल का दर्जा दे दिया। पिछले दो साल से बिना शिक्षकों के संचालित हो रहे इस विद्यालय को अब पूरी तरह बंद करने के आदेश हो गए हैं।
विद्यालय में संचालित हो रही कक्षा छह से दस तक की कक्षाओं के 32 बच्चों को जीआईसी कोटापंद्रपाला जाने को कह दिया गया है। ग्राम प्रधान वीरेंद्र सुयाल, पीटीए अध्यक्ष केशर सिंह पंवार समेत सभी अभिभावकों ने कहा कि यह गरीब बच्चों को यातना देने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि कोटाखड़िक में तत्काल शिक्षक तैनात किए जाएं और विद्यालय का फिर से संचालन किया जाए।
बीईओ ने कहा-यह अस्थायी व्यवस्था
खंड शिक्षा अधिकारी बीपी कुशवाहा कहते हैं कि एक-दो दिन में गेस्ट टीचर्स की तैनाती होगी और कुछ टीचर कोटाखड़िक के लिए मिल जाएंगे। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसीलिए अस्थायी तौर पर बच्चों को नजदीकी विद्यालय भेजा गया है। वह कहते हैं कि उच्चाधिकारियों के संज्ञान में सारा मामला है।