चंपावत। तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यह स्क्रब टाइफस बीमारी का संकेत हो सकता है। समय पर पहचान और तुरंत इलाज से इसे रोका जा सकता है।
जिले में स्क्रब टाइफस का प्रकोप बढ़ गया है। जिला अस्पताल में इस बीमारी के 50 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं। अधिकतर मरीज तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द की शिकायत कर रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, जानकारी के अभाव में लोग समय पर जांच नहीं कराते, जिससे बीमारी गंभीर हो सकती है। यह बीमारी बरसात के मौसम में तेजी से फैलती है।
जिला अस्पताल के मुख्य फिजिशियन अजय कुमार ने बताया कि स्क्रब टाइफस, जिसे बुश टाइफस भी कहा जाता है, ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक जीवाणु से होने वाला संक्रमण है। यह संक्रमित चिगर्स (घुन के लार्वा) के काटने से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। गंभीर मामलों में मस्तिष्क और उसकी झिल्लियों में सूजन भी आ सकती है।
डॉ. अजय ने बताया कि टाइफस का समय पर पहचान होने पर एंटीबायोटिक दवाओं से प्रभावी उपचार संभव है। बुखार को नजरअंदाज न करें। समय पर इलाज कर सही इलाज करें।
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बचाव के लिए बरतें ये सावधानियां
बीमारी से बचने के लिए साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें
बरसात के मौसम में झाड़ियों, घनी घास और वनस्पति वाले क्षेत्रों में जाने से बचें
बच्चों की बाहरी गतिविधियां ऐसे स्थानों पर सीमित रखें
बाहर जाते समय पूरी बांह के कपड़े और लंबी पैंट पहनें, ताकि त्वचा घुन के काटने से सुरक्षित रहे
बुखार, सिरदर्द या शरीर में दर्द के साथ त्वचा पर चकत्ते दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें
स्वयं दवा लेने के बजाय अस्पताल में जांच कराकर उपचार शुरू करें