पिथौरागढ़। सीमांत और दुर्गम जिले में दान में मिले आईसीयू के लिए स्वास्थ्य विभाग और सरकार स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती नहीं कर सकी है। सिर्फ नौ स्टाफ नर्स की तैनाती कर जिम्मेदारी निभा दी गई। चिकित्सक और अन्य कर्मियों की व्यवस्था कर अस्पताल प्रबंधन किसी तरह आईसीयू का संचालन कर मरीजों और घायलों को राहत दे रहा है।
जिले के मरीजों को राहत देने के लिए हंस फाउंडेशन के सहयोग से वर्ष 2019 में जिला अस्पताल में ढाई करोड़ रुपये से आईसीयू स्थापित किया गया। आईसीयू में करोड़ों की मशीनें भी लगा दी गईं, लेकिन संचालन के लिए जरूरी स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो सकी। आईसीयू के संचालन के लिए बेहोशी के डॉक्टर, फिजिशियन सहित 24 स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती होनी है। छह सालों में सिर्फ नौ स्टाफ नर्स ही आईसीयू को मिले हैं। अस्पताल प्रबंधन खुद जरूरी स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती कर आईसीयू का संचालन कर रहा है। लंबे समय बाद भी दान में मिले इस आईसीयू के संचालन के लिए अलग से स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती न होना स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी को हवाई साबित कर रहा है।
गंभीर मरीजों को ले जाना पड़ रहा है हायर सेंटर
पिथौरागढ़। सीमांत और दुर्गम जिले में आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। आए दिन दिल के मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। आईसीयू संचालन के लिए जरूरी और जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती न होने से कई बार मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना अस्पताल प्रबंधन की मजबूरी बना है।
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कोट
आईसीयू के संचालन के लिए नौ स्टाफ नर्स की तैनाती हुई है। इसके अलावा अलग से विशेषज्ञों की तैनाती नहीं है। अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी आईसीयू का संचालन कर रहे हैं। हर मरीज और घायल को इसका लाभ मिले, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन गंभीर है।
डॉ. भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़