शिक्षकों की कमी से जूझ रहे राजकीय इंटर कॉलेज डीडीहाट से इस बार 35 बच्चे नाम कटाकर अन्य स्थानों को चले गए हैं। विद्यालय में 12 प्रवक्ताओं के स्थान पर मात्र पांच से काम चलाया जा रहा है। एलटी ग्रेड में भी शिक्षकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। प्रधानाचार्य का काम प्रभारी देख रहे हैं। एक समय में इस विद्यालय में छात्रसंख्या 1000 का आंकड़ा पार कर चुकी थी। अब यह सिमटकर 250 पर आ गई है। तहसील मुख्यालय के इस विद्यालय की दुर्दशा से अभिभावक खासे चिंतित हैं। खास बात यह है कि यहां से जितने भी शिक्षक स्थानांतरित हुए उनकी जगह नई तैनाती नहीं हो पाई। सुगम और दुर्गम के खेल में यह विद्यालय भी पिस रहा है।
जीआईसी डीडीहाट में हिंदी, अंग्रेजी, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास और समाजशास्त्र पढ़ाने वाले प्रवक्ता नहीं हैं। एलटी स्तर पर विज्ञान और गणित पढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसी तरह लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद भी खाली चल रहे हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य आरपी मौर्य का कहना है कि विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ पढ़ रहा है। उनको अपने विषय के साथ ही अन्य विषयों को भी पढ़ाना पड़ रहा है।
इधर, जानकारी मिली है कि संपन्न परिवारों के 35 बच्चे इस बार विद्यालय से टीसी कटाकर पिथौरागढ़ तथा हल्द्वानी चले गए हैं। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में छात्रसंख्या और भी कम हो जाएगी। शिक्षक अभिभावक संघ के पूर्व अध्यक्ष जोध सिंह बोरा का कहना है कि शिक्षण संस्था की दुर्दशा के लिए सरकार जिम्मेदार है। किसी समय में एक आदर्श विद्यालय की पहचान रखने वाले इस विद्यालय की ऐसी हालत के खिलाफ अब आंदोलन चलाया जाएगा।