बकरी पालन से आत्मनिर्भर बनी डीडीहाट के कूटा चौरानी की वनराजि महिला। संवाद
पिथौरागढ़। समाज से कटे रहने वाले वनराजियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल रंग लाई है। खासकर वनराजि महिलाओं ने स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आर्थिकी मजबूत की है। डीडीहाट और कनालीछीना विकासखंड की 56 वनराजि महिलाओं ने जंगलों से निकलकर बकरी पालन से आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ाया है। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आए हैं।
पिछले वित्तीय वर्ष में रीप परियोजना के तहत वनराजि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल शुरू की गई थी। जिम्मेदार अधिकारियों ने समाज से दूर रहने और जंगलों में पूरा दिन बिताने वाली वनराजि महिलाओं को बकरी पालन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। डीडीहाट विकासखंड के कूटा चौरानी, खेतार कन्याल और कनालीछीना के जमतड़ी, औंलतड़ी की 56 वनराजि महिलाओं का इसके लिए चयन किया और सरकारी तौर पर उनकी आर्थिक मदद की गई। वर्तमान में हर वनराजि महिला 10 से 20 बकरी पाल रही हैं, जिससे उन्हें आठ से 10 हजार रुपये तक की आय भी हो रही है। संवाद
आर्थिकी मजबूत होने से बच्चे भी ले रहे हैं बेहतर शिक्षा
अधिकारियों के मुताबिक वनराजि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का दोहरा लाभ सामने आया है। आम तौर पर वनराजियों की आर्थिक हालत ठीक न होने से वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा या यूं कहें कि उन्हें शिक्षित बनाने से भी किनारा करते थे। वनराजि महिलाओं की आर्थिकी मजबूत हुई तो वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए भी आगे आई हैं। ऐसे में वनराजि महिलाओं की आर्थिकी मजबूत होने के साथ उनके बच्चों का भविष्य बेहतर होने की उम्मीद है।
कोट
वनराजि महिलाओं को रीप परियोजना के तहत बकरी पालन से जोड़ा गया था जिसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। महिलाओं के साथ वनराजि परिवारों की आर्थिकी मजबूत हो रही है और उनके बच्चे भी बेहतर शिक्षा ले रहे हैं। - डॉ. दीपक सैनी, सीडीओ पिथौरागढ़