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शरद ऋतु का है उल्लास, चहकती महकती बेटियों का शिक्षा दे

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पिथौरागढ़ में बालिका दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में संदेश देती बेटियां। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। वक्ताओं ने बेटियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। उन्होंने कहा कि बेटियां ही घर का शृंगार हैं।
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भारती सदन रई में हुए कार्यक्रम में डॉ. तारा सिंह ने शरद ऋतु का है उल्लास, चहकती महकती बेटियों को शिक्षा दें, छूने दो आकाश सृष्टि और प्रगति बेटी से ही है के शब्दों से बेटियों का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जनगणना 2011 में पिथौरागढ़ में बालिका और बालक अनुपात 812: 1000 और चंपावत में 870: 1000 होने पर बेटी को जन्म दो अभियान चलाया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान निरंतर जारी रहेगा। सुनीता ओली ने कहा कि बेटियों के सम्मान में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है लेकिन अब भी कुछ लोगों में बेटी के प्रति निमभन सोच बनी है। कार्यक्रम में जानकी खड़ायत, तनुजा पाल, दृष्टि ततराड़ी, तेजस्वी आकोटी, मिनी सिंह, बबीता भट्ट, कमला बिष्ट, प्रिया शर्मा, ओजस्वी, लक्ष्मी देवी आदि शामिल रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता आशा मोहन ने की।
बेटी है तो कल है...
चंपावत/लोहाघाट (चंपावत)। जिले में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस धूमधाम के साथ मनाया गया। क्वैराला घाटी के सिप्टी में पैरा लीगल वालंटियर प्रकाश जोशी शूल ने बेटी है तो कल है... गीत के जरिये ग्रामीणों को जागरूक किया। उन्होंने म्यारा पहाड़कि चेलि पुस्तक भी वितरित की। इधर, लोहावती वार्ड के आंगनबाड़ी केंद्र में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संकल्प लिया गया। मुख्य अतिथि पैरा लीगल वालंटियर रेनू गड़कोटी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने बेटों की अपेक्षा बेटियों के घटते लिंगानुपात पर चिंता जताते हुए नजरिया बदलने पर जोर दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सविता सक्सेना ने बेटियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मिठाई बांटी। इस मौके पर सहायिका गीता मेहर, रुचि ढेक, साक्षी सक्सेना, किरन सक्सेना आदि थे।
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एकल महिलाओं की समस्याओं को लेकर चर्चा की
धारचूला (पिथौरागढ़)। एक्शन एड के सहयोग और अर्पण संस्था की ओर से आयोजित एकल महिला कार्यशालाओं में एकल महिलाओं की समस्याओं को लेकर चर्चा की गई। इनमें विभिन्न गांवों की 84 महिलाओं ने भाग लिया। अस्कोट, जौलजीबी, बलुवाकोट हुई कार्यशालाओं में संस्था की सचिव रेनू ठाकुर ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य एकल महिलाओं के समक्ष आ रही समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा करना है। कहा कि एकल महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा जरूरी है। समाज में एकल महिलाओं में विधवा परित्यक्ता, अविवाहित काफी संख्या में हैं। इनके सामने आजीविका की समस्या रहती है। भूमि नाम पर नहीं होने के कारण कई योजनाओं का लाभ इन्हें नहीं मिल पाता है। कृषि भूमि में अधिकार पाने में सामाजिक, पारिवारिक सोच व कानूनी प्रक्रिया बड़ी चुनौती है। यहां परियोजना समन्वयक खीमा जेठी, ज्योति, नेहा, रेनू, महिला संगठन की कमला देवी, सलमा बेगम, रंजना, नंदी, तनुजा, गीता, रेखा, मीना आदि थीं।
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