अस्याली के पास रामगंगा में श्रमदान कर बनाए गए अस्थायी पुल से सोमवार रात जब दूल्हा और दुल्हन को लाया गया तो दोनों घबरा गए। इस अस्थायी पुल में कोई रेलिंग नहीं लगी है। 200 साल से गांव में रहने वाले लोग इस पुल का निर्माण श्रमदान से करते हैं। हर साल अक्तूबर के अंत में नदी का जलस्तर कम होने के बाद बनने वाला यह पुल जून में नदी का जल स्तर बढ़ते ही खुद ही बह जाता है। गांव के लोग कई वर्षों से इस स्थान पर पक्के झूलापुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है।
आमतौर पर इस पुल का निर्माण सामान्य आवाजाही के लिए किया जाता है। अस्याली गांव के लोग बारात जैसे कार्यक्रमों के लिए अधिकांश शहर ही जाते हैं। अस्थायी पुल के रास्ते कभी भी बारात नहीं ले जाते हैं। सोमवार को मुुंबई में रहने वाले अस्याली गांव के गणेश सिंह की बारात देवलीगांव गई थी। बारात दिन की थी, लेकिन बारात को लौटते समय रात हो गई। गांव के लोगों ने दुल्हन समेत अस्थायी पुल से ही नदी पार करने का फैसला लिया।
गांव के लोगों ने बताया कि पहली बार और रात के समय इस अस्थायी पुल से आवागमन करने में किसी को भी डर लग सकता है। दुल्हन को तो उससे घबराहट होना स्वाभाविक है। अस्याली गांव के समाजसेवी सुरेश चंद ने बताया कि गांव के लोग अब भी विकास की धारा से कटे हुए हैं। कहा कि दुल्हन को लोगों की मदद से पुल पार कराना पड़ा।