अखंड सौभाग्य के लिए महिलाओं ने किया वट वृक्ष का पूजन
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वट सावित्री अमावस्या पर शनिवार को नगर के प्रमुख मंदिरों में भारी भीड़ रही। हजारों सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना के लिए वट वृक्ष का पूजन किया। घंटाकरण शिव मंदिर, पितरौटा शिव मंदिर और घुपौड़ शिव मंदिर में सुबह तीन बजे से पूजा शुरू हो गई। पूजा का यह कार्यक्रम पूरे दिन चला। घंटाकरण शिव मंदिर में पंडित आनंद बल्लभ जोशी ने वट सावित्री का पूजन कराया। मुख्य पूजा के बाद महिलाएं अपने गले में रक्षा तागा पहनती हैं और वट के पेड़ पर रक्षा तागा लपेटा जाता है।
पं. जोशी ने बताया कि सती सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा के लिए वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही तपस्या की थी। उसकी तपस्या से खुश होकर भगवान ने उसके पति को मृत्यु के मुंह से वापस लौटा दिया। अतीतकाल से लोग सती सावित्री की इसी तपस्या को आधार मानकर आज के दिन उपवास रखकर पूजन करते हैं।
उन्होंने बताया कि जो महिला पूरी श्रद्धा के साथ यह पूजन करती है उसको अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ग्रामीण अंचलों में वट सावित्री के पर्व को लेकर भारी उत्साह देखा गया। गांवों में वट वृक्ष अमूमन नहीं होते। इस कारण लोग सामूहिक रूप से सती और सत्यवान के चित्र के सामने पूजा करते हैं। जिले के डीडीहाट, गंगोलीहाट, थल, बेड़ीनाग में वट सावित्री अमावस्या का पर्व पूरी आस्था के साथ मनाया गया।