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मस्मोली गांव के पांच परिवारों ने छोड़ा अपना देश

Fri, 03 Nov 2017 10:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
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थल के मस्मोली गांव में खाली पड़ा मकान - फोटो : अमर उजाला
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मस्मोली गांव में इंटर कॉलेज, पेयजल व्यवस्था के साथ ही सड़क की सुविधा भी है, लेकिन उच्च शिक्षा, रोजगार और पैसों की चाह ने इस गांव को भी वीरान कर दिया। यहां के लोगों ने शिक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया और इंटर तक की शिक्षा गांव में दिलाने के बाद बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए शहरों के अच्छे कॉलेजों में भेजा। बस यहीं से गांव छोड़ने का क्रम शुरू हो गया। शहरों के कॉलेजों में पढ़ने के बाद गांव के कई लोग शिक्षक, इंजीनियर, चार्टेड अकाउंटेंट जैसे पदों तक पहुंचे, लेकिन वह लौटकर गांव नहीं आए। पांच परिवार तो विदेश में जाकर बस चुके हैं। वहीं, इनके देखादेखी अन्य लोगों ने भी यही राह पकड़ी और गांव छोड़ने का क्रम तेज हो गया। नतीजतन 100 परिवारों वाले मस्मोली गांव में अब सिर्फ 15 परिवार रह गए हैं।
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इस गांव के श्रीनिवास जोशी नाइजीरिया में, आशुतोष जोशी और हिमांशु जोशी अमेरिका में, हेमंत जोशी दक्षिण अफ्रीका में और संजय जोशी सिंगापुर चले गए हैं। यही नहीं गांव के सीएम जोशी जोधपुर, रेवाधर जोशी हैदराबाद, बद्रीप्रसाद जोशी नोएडा, हेम चंद्र जोशी हरिद्वार, राजेंद्र जोशी दिल्ली, प्रेमप्रकाश जोशी और त्रिभुवन जोशी भोपाल जाकर बस गए हैं। 30 वर्ष पहले तक मस्मोली गांव में 100 परिवार रहते थे। पहाड़ के शिक्षित और संपन्न गांवों में मस्मोली का नाम भी आता था, लेकिन एक-एक कर लोगों ने गांव को छोड़ना शुरू किया और अब तक 85 परिवार मस्मोली गांव छोड़कर जा चुके हैं।

एक समय में गांव की आबादी 700 से ज्यादा थी, जो अब घटकर 100 पहुंच गई है। बड़ी आबादी वाला गांव होने के कारण पहले यहां पर राजनीतिक दलों के लोगों की आवाजाही भी ज्यादा होती थी। अब मतदाताओं की संख्या कम हुई तो राजनीतिक दलों के लोगों का आना भी कम हो गया है। हालांकि, गांव में राजकीय इंटर कॉलेज है, गांव तक सड़क पहुंची है, पेयजल योजना बनी है। इसके बावजूद उच्च पदों पर आसीन लोगों ने गांव लौटकर आने की जरूरत नहीं समझी।
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गरीब और अशक्त लोगों का गांव
मस्मोली निवासी दमयंती जोशी का कहना है कि अब गांव में गरीब और अशक्त लोग ही रह गए हैं। वह कहती हैं कि सिर्फ खुशी इस बात की है कि गांव के कई परिवार विदेश में हैं और देश के बड़े शहरों में जाकर बस गए हैं। वह कहती हैं कि सरकार ने गांव के लिए बहुत कुछ किया, लेकिन संपन्न लोग गांव में आकर बसना नहीं चाहते। जिन लोगों के पास साधन हैं वह लगातार गांव छोड़ रहे हैं। 

पहाड़ के हर गांव के साथ यही विडंबना
मस्मोली निवासी जानकी जोशी कहती हैं कि अलग राज्य बनने के बाद यह विचार किसी के मन में नहीं आया कि गांवों में वापस लौटा जाए। वैसे भी जो लोग राज्य बनने से पहले ही गांव छोड़ चुके थे, वह क्यों वापस लौटेंगे। वह कहती हैं कि आने वाली पीढ़ियों के साथ भी यही समस्या आएगी। जो अच्छा पढ़ लिखकर बड़े पद पर पहुंचेगा वह भी गांव छोड़कर चला जाएगा। पहाड़ के हर गांव के साथ यही विडंबना है।
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