डीडीहाट के किरौली वन पंचायत में लगी आग।
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गर्मी बढ़ने के साथ ही सीमांत जिले में आग की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। इस सीजन में अब तक आग की 28 घटनाओं में 55 हेक्टेयर वन जलकर खाक हो गया है। आग से वन विभाग को 1.24 लाख रुपये के नुकसान का आंकलन है। अलबत्ता अभी तक वनों में आग लगाने की घटना में कोई पकड़ा नहीं गया है। घनधूरा मृग विहार, वन पंचायत किरौली, खेतार भंडारी और कनालीछीना के बसौरा के जंगलों में आग धधकी हुई है। इससे संपदा को काफी नुकसान पहुंच रहा है।
बारिश नहीं होने से जंगल आग की चपेट में आ रहे हैं। अब तक बरम में मेतली के जंगल और अस्कोट के जंगलों को आग से काफी नुकसान पहुंचा है। कनालीछीना विकासखंड में गुड़ौली और ख्वांतड़ी सहित कई स्थानों पर आग से लाखों की वन्य संपदा नष्ट हो चुकी है। गंगोलीहाट रिजर्व फारेस्ट के लमकेश्वर और पश्चिमी चंडिका घाट समेत तीन जगहों पर आग लगने से भी वन्य संपदा के साथ ही पर्यावरण को काफी क्षति हुई है। चीड़ के जंगलों में लगी आ पर वन विभाग की टीम ने बमुश्किल काबू पाया। शुक्रवार को डीडीहाट के विभिन्न जंगलों में आग धधक गई। खेतार कन्याल के क्षेत्र पंचायत सदस्य महेश कन्याल ने बताया कि घनधूरा मृग विहार, वन पंचायत किरौली, खेतार भंडारी और कनालीछीना के बसौरा के जंगलों में आग धधकी हुई है। इससे संपदा को काफी नुकसान पहुंच रहा है।
वन विभाग की ओर से संवेदनशील 615 ग्राम पंचायतों को 8800 रुपये की धनराशि आग पर काबू पाने को दी गई है। साथ ही 120 वन पंचायतों को 10 हजार रुपये की धनराशि आग बुझाने के नाम पर दी गई है। इसके बावजूद सीमांत के जंगलों का आग से धधकना आश्चर्यजनक और चिंतनीय है। ग्रामीण अच्छी घास के लालच में जंगलों में आग लगा देते हैं लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं कि उनके इस कृत्य से बहुमूल्य वन संपदा के साथ ही वन्य जीवों को भी जान के लाले पड़ जाते हैं।