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माइग्रेशन पर लौटे सेला के लोगों ने नाले पर बनाई अस्थायी पुलिया

Sat, 11 May 2019 10:59 PM IST
kamlesh kamlesh ब्यूरो/ अमर उजाला , धारचूला (पिथौरागढ़)।
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सेला गांव के साहसी युवा फैलिंग नाले में लकड़ी का पुल बनाते। - फोटो : पिथौरागढ़
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माइग्रेशन पर गांव लौटे दारमा घाटी के सेला के लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को ही गांव लौटे लोगों को पहले गांव के समीप बहने वाले फैलिग नाले पर लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनानी पड़ी। इस पुलिया से जान जोखिम में डालकर गांव के लोगों ने पांच किमी दूर पहुंच कर पानी की योजना की मरम्मत कर पीने के पानी का इंतजाम किया।
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शनिवार को सेला के लोग माइग्रेशन पर मूल गांव सेला पहुंचे तो गांव में पीने के लिए पानी नहीं था। पानी की योजना की मरम्मत में गांव के समीप बहने वाला फैलिग नाला बाधा बन गया। फैलिग नाले पर बनी पुलिया वर्ष 2016 में बह गई थी। तब से हर साल सेला के लोगों को नाले में लकड़ी डालकर आवागमन करना पड़ता है। गांव पहुंचे महिला, पुरुषों ने लकड़ियों का इंतजाम कर नाले में लकड़ियां डाली। गांव के युवा लकड़ियों के सहारे नाले को पार कर पांच किमी दूर जलस्रोत पर पहुंचे। पानी की लाइन की मरम्मत कर गांव के
लिए पानी चलाया।

नव युवक मंगल दल सेला के सचिव रोशन सेलाल ने बताया कि गांव के लोग 2016 की आपदा में पुल बहने के कारण प्रतिवर्ष नाले में लकड़ियां डालकर अस्थाई पुलिया बनाते हैं। फिर पानी की लाइन ठीक करके पीने के पानी का इंतजाम करते हैं। सेला की प्रधान ममता सेलाल ने बताया कि प्रशासन को लगातार जानकारी देने के बाद भी नाले में पुलिया नहीं बनाई जा रही है। लकड़ी का पुल बनाने में राम सिंह, नरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, सुंदर सिंह समेत तमाम लोगों ने श्रमदान किया। इस समय माइग्रेशन पर सेला के 50 लोग पहुंचे हुए हैं। आने वाले दिनों में 50 और लोग माइग्रेशन पर गांव पहुंचेंगे।
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