रचनात्मक शिक्षक मंडल की रविवार को नगरपालिका हाल में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति की जमकर खिलाफत की। उदारीकरण की आर्थिक और राजनैतिक नीतियों के कारण शिक्षा के निजीकरण और बाजारीकरण की रफ्तार तेज हो गई है।
शिक्षा के संकट, समाधान और शिक्षक संगठनों की भूमिका विषय पर आयोजित गोष्ठी में आधार पत्र प्रस्तुत करते हुए दिनेश भट्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के जरिए शिक्षा को मौलिक तो कह दिया लेकिन लेकिन शिक्षा को असमान बनाकर बाजार के हाथों सौंप दिया है। मुख्य वक्ता रामनगर से आए नवेंद्र मठपाल ने कहा कि भारतीय शिक्षा बिकाऊ माल और मुनाफे का जरिया हो गई है। पीपीपी मोड निजीकरण का महामंत्र बन गया है। देश के कई राज्य इसी पीपीपी की आड़ में स्कूलों को नीलाम कर चुके हैं। अध्यक्षता करते हुए प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष निर्मला महर ने कहा कि आज सरकारी प्राथमिक शिक्षकों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने शिक्षा के निजीकरण का पुरजोर विरोध का ऐलान किया।
गोष्ठी में राजीव जोशी, पौड़ी के शिक्षक मुकेश बहुगुणा, चमोली के केके डिमरी, पिथौरागढ़ के भास्करानंद जोशी, सीबी कन्याल, कंचन तिवारी, करन थापा, सरिता बिष्ट, जयवीर सिंह, रीतू जोशी, शांति भंडारी, मुकेश चंद, अनिल राठौर, विनोद बसेड़ा ने संबोधित किया। संचालन राजीव जोशी और रवि बगौटी ने किया।