वरिष्ठ भू-विज्ञानी पद्म भूषण प्रोफेसर खड़क सिंह वल्दिया ने राजकीय इंटर कालेज गोरंगचौड़ में हुए सम्मान समारोह में कहा कि समाज के लिए कुछ नया करने की चाहत ही मंजिल तक पहुंचाती है।
प्रोफेसर वल्दिया ने बचपन से ही लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ाई करने की सीख देते हुए कहा कि निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही सफलता की कुंजी है। प्रोफेसर वल्दिया ने भू-विज्ञान से जुड़ी तमाम जानकारियां विद्यार्थियों को दी। संबोधन के बाद प्रोफेसर वल्दिया विद्यार्थियों के बीच चल दिए। विद्यार्थियों की विज्ञान से जुड़ी तमाम जिज्ञासाओं को शांत किया, सफलता के टिप्स दिए। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर वल्दिया के बालसखा तुलसी दत्त पांडेय ने अपने और प्रोफेसर वल्दिया के बचपन से जुड़े संस्मरण सुनाए। प्रवक्ता किशोर चंद्र पाटनी ने प्रोफेसर वल्दिया के जीवन पर प्रकाश डाला। 1988 में कुमाऊं विश्वविद्यालय में प्रोफेसर वल्दिया के छात्र रहे शिक्षक संजय पांडेय ने प्रोफेसर वल्दिया के सानिध्य में बिताए दिनों को याद किया।
इससे पहले विद्यालय पहुंचने पर छात्राओं ने सरस्वती वंदना के साथ प्रोफेसर वल्दिया, उनकी धर्मपत्नी इंदिरा वल्दिया और छोटे भाई जितेंद्र सिंह वल्दिया का स्वागत किया। पीटीए अध्यक्ष दयाकृष्ण कांडपाल, प्रभारी प्रधानाचार्य मोहन चंद्र पाठक, शिक्षिका पूनम महर ने शाल ओढ़ाकर, स्मृतिचिन्ह भेंटकर प्रोफेसर वल्दिया को सम्मानित किया। मान सिंह खोलिया के संचालन में हुए कार्यक्रम में पूर्व प्रधानाचार्य हरीश चंद्र पाटनी, पीवी पंत, पुष्पराज भट्ट, बीके सिंह, हरचरण वर्मा, खीमानंद भट्ट, नवीन चंद्र टम्टा, डा. पीतांबर अवस्थी, राजेश मोहन उप्रेती, मंजू चन्याल, मोहन सिंह महरा, डा. भगवती प्रसाद पाठक, महेश उपाध्याय, राजेश्वरी रौतेला, पूरन सिंह ऐरी, मंजू साह, विक्रम सिंह नेगी, अर्जुन सिंह, भुन चंद्र कांडपाल, भूपेंद्र सिंह, हर सिंह बोहरा समेत तमाम लोग मौजूद थे।