नाचनी घाटी में कीट लगने से खराब हुई रामदाना की फसल
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उच्च हिमालयी गांव नामिक में रामदाने (चुआ) की फसल में कीट लगने से किसानों की 200 क्विंटल फसल चौपट हो गई है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में तैयार होने वाली फसल में माह के पहले ही सप्ताह में कीट लगने से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रभावित किसानों नेे सरकार से मुआवजे की मांग की है।
रामदाने की बुवाई मिश्रित खेती के रूप में की जाती है, जिसे मडु़वे और जौ के साथ उगाया जाता है। ग्रामीण किसान रामदाने को जौ और मडु़वे के साथ पीसकर आटा तैयार करते हैं। रामदाना कई ग्रामीण किसानों की आय का भी अच्छा स्रोत है। ग्रामीण क्षेत्रों में रामदाने की कीमत 20 से 25 रुपये प्रति किलो है। कीट लगने से बर्बाद हुई फसल को लेकर किसान खासे परेशान हैं। गांव के किसान कुंवर सिंह, प्रवीण सिंह, खुशाल सिंह ने बताया कि 12 वर्ष पहले भी कीट के हमले से उनकी रामदाने की फसल बर्बाद हो गई थी। इस बार फिर से रामदाने की फसल को कीटों ने चौपट कर दी है।
क्वीटी के प्रधान तुलसी देवी ने कहा कि कीट लगने की सूचना कृषि विभाग को भिजवा दी गई थी, लेकिन सड़क और संचार के अभाव में सूचना पहुंचने में देरी हो गई। उन्होंने बताया कि विभाग से किसानों को मुआवजा देने की मांग की गई है। वहीं, मडलकिया न्याय पंचायत के कृषि प्रभारी दयानंद निराला का कहना है कि कीट की सही पहचान नहीं हो पाई है। उन्होंने रामदाने की फसल में माहू नामक कीट होने की आशंका जताई है। उन्होंने बताया कि कीट से बचाव के लिए रसायनिक कीटनाशक का छिड़काव उचित नहीं है। कहा कि कीटनाशक के लिए नीम ऑयल नामक जैविक दवा का प्रयोग किया जाएगा। नीम ऑयल से कीटों के फैलने पर नियंत्रण किया जा सकता है।