नगर निकाय चुनाव में पिथौरागढ़ जिले का सियासी पारा सर्दी में भी रिकार्ड तोड़ रहा है। कांग्रेस और भाजपा को बागियों से निपटना बेहद मुश्किल हो रहा है। कांग्रेस के भीतर तो शहर के विधायक ने ही प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष के खिलाफ खुलेआम जंग का एलान कर दिया है। इससे सीमांत जिले का माहौल गरम और दिलचस्प हो गया है। पहली बार अस्तित्व में आई पिथौरागढ़ नगर निगम सहित छह निकायों में चुनाव होंगे। इन सभी निकायों में मेयर और अध्यक्ष पद के लिए चुनावी मैदान में 32 प्रत्याशी हैं। पिथौरागढ़ नगर निगम में सबसे अधिक आठ उम्मीदवार हैं। डीडीहाट, धारचूला नगर पालिका में सबसे कम तीन-तीन प्रत्याशी ताल ठोक रहे हैं। अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए कांग्रेस-भाजपा पूरा जोर लगा रही है। ये चुनाव बेशक मेयर, चेयरमैन और पार्षदों के लिए हो रहे हैं, लेकिन परीक्षा विधायकों की भी है। इनके परिणामों से पता चलेगा की विधायकों की अपने क्षेत्र में कितनी पकड़ है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी निकाय के ये परिणाम माहौल बनाएंगे।
पिथौरागढ़ में मयूख की असली परीक्षा
पिथौरागढ़ नगर निगम के पहले चुनाव में कांग्रेस विधायक मयूख महर की बगावत से मुकाबला रोचक हो गया है। वह पार्टी प्रत्याशी के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में खड़े हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने 33,269 वोट पाकर बड़ी जीत दर्ज की थी। यह निकाय चुनाव उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि एक तरफ उनकी लड़ाई अपनी ही पार्टी कांग्रेस से है तो दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी से। ऐसे में अपनी उम्मीदवार को जिताना उनके लिए अपने सियासी अस्तित्व को बचाने जैसा है। वहीं, भाजपा के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा से जुड़ी है। भाजपा सरकार ने ही पिथौरागढ़ नगर पालिका का उच्चीकरण कर नगर निगम बनाया है। पिथौरागढ़ सीएम धामी का गृह जनपद भी है। भाजपा में भी टिकट को लेकर बगावत हुई है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर तीन बागी निर्दलीय रूप में मैदान में हैं। भाजपा के सामने भी बड़ी चुनौतियां हैं।
डीडीहाट चुनाव... विधायक चुफाल की प्रतिष्ठा का सवाल
डीडीहाट नगर पालिका में भाजपा, कांग्रेस के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां अब तक हुए निकाय चुनाव में भाजपा का ही दबदबा रहा है। अब तक हुए छह निकाय चुनावों में चार बार नगर की सत्ता भाजपा के हाथों में रही है। यह पालिका बिशन सिंह चुफाल के विस क्षेत्र में है। चुफाल यहां से लगातार छह बार विधायक चुने गए हैं। पिछले चुनाव में भी उन्हें 20594 मत मिले थे। निकाय चुनाव में इस बार यहां कांग्रेस के साथ ही यूकेडी के समर्थन वाले निर्दलीय मैदान में हैं। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी को पालिकाध्यक्ष बनाना विधायक चुफाल की प्रतिष्ठा से जुड़ गया है।
धारचूला..मुनस्यारी में हरीश धामी के कद का चलेगा पता
धारचूला पालिका और मुनस्यारी नगर पंचायत धारचूला विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। हरीश धामी यहां के विधायक हैं। इन दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने का दबाव धामी पर है। कांग्रेस विधायक लगातार तीन चुनावों से कांग्रेस का झंडा बुलंद करते आ रहे हैं। पिछले चुनाव में धामी को 27,007 वोट मिले थे। धारचूला में अध्यक्ष पद के लिए तीन जबकि मुनस्यारी में पांच प्रत्याशी ताल ठोक रहे हैं।
गंगोलीहाट, बेड़ीनाग में फकीर राम की साख दांव पर
गंगोलीहाट और बेड़ीनाग पालिका में भाजपा विधायक फकीर राम टम्टा की साख दांव पर है। गंगोलीहाट नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए छह और बेड़ीनाग में सात प्रत्याशी मैदान में हैं। गंगोलीहाट में भाजपा से बगावत कर पूर्व ब्लॉक प्रमुख खुद मैदान में हैं तो कांग्रेस ने टिकट फाइनल करने से पहले एक प्रत्याशी के नाम पर सहमति बना ली। गंगोलीहाट में भाजपा को कांग्रेस सहित निर्दलीय प्रत्याशियों से चुनौती मिल रही है। देखना दिलचस्प होगा कि विधायक फकीर राम टम्टा बागियों के साथ ही विपक्षी दल से पार पाकर दोनों निकायों में पार्टी प्रत्याशियों को जिताते हुए अपना वर्चस्व कायम रख सकेंगे या नहीं। पिछले विस चुनाव में फकीर राम को यहां 32,296 वोट मिले थे। संवाद
चंपावत जिला...दिग्गजों की साख बनाए रखने की चुनौती
चंपावत। जिले के चार नगर निकायों का परिणाम 2027 विधानसभा चुनाव का भविष्य तय करेगा। इसमें कई दिग्गजों की साख भी दांव पर है। जिले की नगरपालिका चंपावत, टनकपुर, लोहाघाट और नगर पंचायत बनबसा में आरक्षण के लिए सभी समीकरण बदल गए हैं।
चंपावत...हाईप्रोफाइल सीट पर रोचक होगा मुकाबला
पिछले तीन साल से चंपावत जिला हाईप्रोफाइल बना हुआ है। चंपावत पालिका, टनकपुर पालिका और बनबसा नगर पंचायत सीएम पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। चंपावत नगर पालिका चुनाव में भाजपा की प्रत्याशी पूर्व जिपं अध्यक्ष प्रेमा पांडेय हैं जबकि भाजपा के बागी निवर्तमान पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा की पत्नी ममता वर्मा और कांग्रेस की प्रत्याशी नीमा कठायत चुनाव मैदान में हैं। यहां त्रिकोणीय मुकाबला है। इसके अलावा, अन्य कई निर्दलीय भी मैदान में हैं। भाजपा की प्रेमा पांडेय की टक्कर कांग्रेस की प्रत्याशी से तो है ही, साथ ही उन्हें बागी विजय वर्मा की पत्नी ममता वर्मा से भी पार पाना होगा।
पिछली बार यह सामान्य सीट थी लेकिन इस बार यह महिला आरक्षित हो गई। इसलिए पुरुष दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। पुरुष दावेदारों ने अपनी पत्नियों के लिए दावेदारी की। इसमें निवर्तमान पालिकाध्यक्ष विजय वर्मा, विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी, जिला उपाध्यक्ष कैलाश अधिकारी समेत करीब 10 नामों में से पार्टी ने पूर्व जिपं अध्यक्ष रही प्रेमा पांडेय को प्रत्याशी बनाया। अब देखना यह है कि चंपावत, टनकपुर और बनबसा से पार्टी प्रत्याशी कड़ी टक्कर के बीच सीएम को जीत का तोहफा दे पाते हैं या नहीं।
टनकपुर नगर पालिका....पिछली बार निर्दलीय जीतकर भाजपा में शामिल हुए निवर्तमान विपिन कुमार वर्मा पर पार्टी ने दोबारा भरोसा जताया है। यहां हेमा वर्मा कांग्रेस प्रत्याशी हैं। यहां कुल सात प्रत्याशी मैदान में हैं, इनमें एक बसपा और चार निर्दलीय हैं।
बनबसा नगर पंचायत...चेयरमैन के लिए टिकट नहीं मिलने से नाराज विजेंद्र कुमार रातों रात भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए और कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताते हुए पार्टी प्रत्याशी बनाया। यहां आशा कार्यकर्ता रेखा देवी भाजपा से चुनाव लड़ रही हैं। उन्होंने आशा कार्यकर्ता के पद से इस्तीफा दे दिया है। दिग्गज उन्हें जिताने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। यहां कुल चार प्रत्याशी मैदान में हैं जिनमें दो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
लोहाघाट में खुशाल सिंह की होगी परीक्षा
लोहाघाट नगर पालिका...यह पालिका लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र में आती है। कांग्रेस के खुशाल सिंह अधिकारी यहां के विधायक हैं। पार्टी प्रत्याशी रनजीत अधिकारी को जिताने का दबाव उन पर है। यहां से गोविंद वर्मा भाजपा प्रत्याशी हैं। वर्ष 2013 में भाजपा से बगावत कर गोविंद वर्मा ने पत्नी लता वर्मा को चुनाव लड़ाया और वह जीत गईं। इसके बाद 2018 में स्वयं गोविंद वर्मा ने भाजपा प्रत्याशी को पराजित कर चुनाव जीता था। हालांकि जीतने के बाद गोविंद भाजपा में शामिल हो गए थे। इस बार भाजपा ने ओबीसी वर्ग के गोविंद को टिकट दिया है। उनके सामने कांग्रेस प्रत्याशी रनजीत अधिकारी तो हैं ही साथ में भाजपा के बागी पूर्व नपं अध्यक्ष भूपाल सिंह मेहता भी हैं। यहां चार प्रत्याशी निर्दलीय हैं।