पिथौरागढ़। जहां एक ओर समय के साथ तमाम प्रथाएं और रीतियां समाप्त हो चुकी हैं वहीं गंगोलीहाट के पाली, पोखरी और अग्रौन के ग्रामीण होली पर्व पर मणकोटी राजा के शासन काल में शुरू हुई परंपरा आज भी निभा रहे हैं। तीनों गांवों के लोगों ने रविवार को पोखरी में स्थित केदारी शिला दरबार (चंडी कोट) पहुंचकर होली का शुभारंभ किया।
होल्यारों ने कोट में झंडे गाड़कर होली गायन किया। हूं जोर सूरत धरे मठ भीतर..., अंबा जन तेरो..., इन नगरकोट से महामायी..., जै देवी ऐन भवानी... आदि होली गीत गाए। स्थानीय सुरेश चंद्र जोशी ने बताया कि मणकोटी राजा के शासनकाल में यह परंपरा चल रही है। पहले चिटगल गांव भी इसमें शामिल था।
अब पाली, पोखरी और अग्रौन तीन गांवों के लोग इसी दरबार में पहुंचकर होली का शुभारंभ करते हैं। उन्होने बताया कि चंडी कोट तक पहुंचने के लिए मीलों की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। वहां पिथौरागढ़ के पूर्व पालिका अध्यक्ष जगत सिंह खाती, द्वारिका प्रसाद जोशी, ललिता प्रसाद जोशी, हरीश चंद्र पंत, गिरीश पंत, निर्मल पंत, शंकर पंत, जगदीश खाती आदि ग्रामीण थे। संवाद