बिजली के झूलते तार लोगों की जान ले रहे हैं और विभाग है कि सिर्फ मौका मुआयने तक ही सीमित है। बहुत हुआ तो मुआवजा देकर पल्ला झाड़ लेता है। नतीजतन कुछ दिनों बाद फिर नई घटना सामने आ जाती है। विभाग कभी इन झूलते तारों को ठीक करने की जरूरत महसूस नहीं करता है और न टेढ़े पोलों को सीधा करने की कोशिश की जाती है।
छह माह पहले जब ऐंचोली गांव के खाली गांव में युवक किशन सिंह की करंट से मौत हुई थी तब लोगों ने शव को विद्युत विभाग के दफ्तर में ही पहुंचा दिया था। झूलते तारों को ठीक करने की मांग को लेकर लोगों ने उग्र प्रदर्शन किया। विभाग ने अपनी कार्यशैली सुधारने के बजाए आंदोलनकारियों पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया था। विद्युत विभाग के अधिकारी घटना के बाद अपनी गलती को स्वीकार नहीं करते। खाली की घटना से पहले इसी इलाके के रावलगांव में दलीप सिंह की भी करंट लगने से मौत हो गई थी।
मुनस्यारी तहसील में चार माह पहले करंट से मौत की दो घटनाएं हुई थी। गिरगांव के बुजुर्ग दुर्गा सिंह की अपने आंगन में ही करंट लगने से छह नवंबर 2015 को मौत हो गई थी। मदकोट से शिलिंग गांव में भी जंगल में जानवर चराने गए एक युवक की आठ माह पूर्व मौत हुई। अभी तीन दिन पूर्व जिला मुख्यालय से सटे चैंसर गांव में करंट की चपेट में आकर एक गरीब की तीन बकरियां मर गई थी। विभाग के अधिकारी ऐसी घटनाओं के बाद अपनी गलतियों में जाने के बजाए यह प्रयास करते हैं कि हादसे की चपेट में आने वाले के सिर पर ही दोष मढ़ दिया जाए।
पोल में करंट क्यों आता है, बिजली के तार क्यों झूलते हैं, पोल क्यों टेढ़े होते हैं, इस बारे में अधिकारी कभी कोई सटीक जवाब नहीं देते। विद्युत विभाग के उपखंड अधिकारी वीके बिष्ट ने रविवार की घटना के बाद भी यही कहा कि मौके पर जाकर घटना के कारणों का पता लगाया जाएगा।
यह सरासर गैर जिम्मेदारी है
जिला अधिवक्ता संस्था के अध्यक्ष मोहन चंद्र भट्ट का कहना है कि करंट से मौत के मामले में विभाग की गैर जिम्मेदारी सामने आती है। वह कहते हैं कि ऐसी वारदात में आपराधिक मामले दर्ज होने चाहिए। लोगों को भी इस बात के लिए जागरूक रहना चाहिए कि यदि कहीं पर भी खतरा हो तो तत्काल विभाग को जानकारी दें।
यह सिलसिला कब रुकेगा
उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष शमशेर महर का कहना है कि बिजली के तारों को अस्त-व्यस्त छोड़ा गया है। खतरा सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ही नहीं शहरों में भी है। विभाग निर्दोष लोगों की मौत से कब सबक लेगा कहा नहीं जा सकता। वह कहते हैं कि बिजली की लाइनों की मरम्मत के नाम पर हमेशा बड़ा घपला होता है।
इसके लिए तत्काल जिम्मेदारी तय हो
समाजसेवी राजेंद्र भट्ट का कहना है कि ऐसी घटना के तत्काल बाद जिम्मेदारी तय हो जानी चाहिए। पीड़ित परिवारों को कम से कम दस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। वह कहते हैं कि आंदोलन करने के बाद भी विभाग पर कोई असर नहीं पड़ता। जिलाधिकारी एवं अन्य जिम्मेदार लोगों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
ऐसे मामले सरकार को भी देखने चाहिए
ठेकेदार यूनियन के अध्यक्ष तारा चंद का कहना है कि ऐसे मामलों का संज्ञान सरकार को भी लेना चाहिए। जिले में विभाग के जो बड़े अधिकारी बैठते हैं उनसे तत्काल पूछताछ की जाए और तत्काल कार्रवाई के लिए कहा जाए। वह कहते हैं कि ऐसे मामले अनदेखी के कारण ही सामने आते हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए।