पिथौरागढ़। कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सेंटर सेक्टर स्कीम के तहत किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाए हैं। जिले के आठों ब्लाकों में आठ एफपीओ बना लिए गए हैं। इनके माध्यम से छोटे किसान अपने उत्पादों को बेच रहे हैं। सीमांत में करीब 1500 किसान इन एफपीओ से जुड़े हैं।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक राकेश कन्याल ने बताया कि शुरुआत में एक एफपीओ में 100 सदस्य बनाए जाने हैं। उसके बाद इनकी संख्या 200 होनी चाहिए। मुनस्यारी और गंगोलीहाट में नाबार्ड जबकि अन्य छह ब्लॉकों में केंद्र सरकार की एजेंसी एएफएसी ने एफपीओ बनाए हैं। इससे किसानों के समक्ष अपने उत्पादों को बेचने की समस्या नहीं रहेगी। एफपीओ के पास जितनी धनराशि होगी उतना ही केंद्र सरकार देगी। इन एफपीओ के माध्यम से छोटे किसानों के उत्पादों को एकत्र कर विपणन की व्यवस्था करना है।
उन्होंने बताया कि मुनस्यारी में राजमा, आलू और गणाईगंगोली में मोटे अनाजों पर कार्य हो रहा है। बासुकीनाग कृषक उत्पादक संगठन सहकारी समिति के सीईओ मोहन जोशी ने बताया कि उनके समूह ने दो साल में 15 लाख रुपये से अधिक का टर्न ओवर किया है। इससे समूह को 1.50 लाख रुपये का लाभ हुआ। इस लाभ को समूह के सदस्यों को बांटा जाता है। बताया कि समूह में 190 सदस्य हैं। एफपीओ कृषि के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। संवाद
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परंपरागत उत्पादों को दे रहे हैं बढ़ावा
पिथौरागढ़। बासुकीनाग कृषक उत्पादक संगठन गणाईगंगोली ने अपने सदस्यों को विलुप्त हो रही कोणी का बीज उपलब्ध कराया है। सदस्यों से जामिर का चूख, बाजरा के 200 झाड़ू बनाकर बेचे गए। मडुवा, सोयाबीन, भट, गहत, मसूर समेत अन्य परंपरागत उत्पादों को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। संगठन के सीईओ मोहन जोशी ने बताया कि सदस्यों को खेती, पशुपालन के लिए जागरूक करने को समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संवाद