पिथौरागढ़। जिले के सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए लंबे समय से शिक्षक नहीं हैं। 128 राजकीय इंटर कॉलेज और 87 हाईस्कूल स्कूलों में प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों के 1250 पद रिक्त चल रहे हैं। नए शिक्षा सत्र में पढ़ने वाले 18 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को बगैर गुरु के सभी विषयों का ज्ञान नहीं मिल पा रहा है।
पिथौरागढ़ जिले में दुर्गम और सुगम क्षेत्रों में 128 राजकीय इंटर कॉलेज और 87 हाईस्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों में लगभग 18000 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। जिले में तैनात 409 प्रवक्ता और 1142 सहायक अध्यापकों के पास अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पढ़ाने का जिम्मा है। जिले में प्रवक्ताओं के 760 और सहायक अध्यापकों के 490 पद लंबे समय से रिक्त हैं। इनमें से अधिकतर शिक्षकों के पास प्रधानाचार्य का प्रभार भी है। ऐसे में उन्हें पढ़ाने के साथ ही विद्यालय के अन्य कार्य भी देखने पड़ते हैं। दुर्गम के कई स्कूलों में हालात ये हैं कि छात्र-छात्राओं को हिंदी पढ़ाने वाले शिक्षक अंग्रेजी तो विज्ञान पढ़ाने वाले इतिहास पढ़ा रहे हैं। बच्चों को सरकारी स्कूलों से निजी स्कूलों का रुख करना पड़ रहा है। संवाद
प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को भेजी है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, वहां छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए व्यवस्था की गई है। शासन स्तर से ही नियुक्ति संभव है।
-एचआर कोहली, सीईओ, पिथौरागढ़।