झूलाघाट (पिथौरागढ़)। एक समय था जब झूलाघाट- पिथौरागढ़ मार्ग पर रोडवेज की प्रतिदिन आठ बसें संचालित होती थीं। करीब 15 साल पहले तक रोडवेज की स्थिति इस रोड पर काफी अच्छी थी। अब महज दो बसों का ही संचालन होता है।
डेढ़ दशक पहले तक यह मार्ग रोडवेज के लिए सबसे कमाऊ मार्ग होता था। झूलाघाट से टनकपुर, अल्मोड़ा, रानीखेत, बनबसा, दिल्ली, देहरादून, पिथौरागढ़ डाकगाड़ी तब प्रतिदिन चलती थीं। रोडवेज सेवा से जहां परिवहन विभाग को अच्छी आय होती थी वहीं जनता को भी सफर में सुविधा होती थी। प्रतिदिन संचालित होने वाली बसों के टिकट पहली रात को ही बुक हो जाते थे। सीमावर्ती जिला होने के कारण जैसे-जैसे नेपाल में सड़कों का जाल बिछता गया। वहां की सवारियां रोजगार के लिए बैतड़ी से महेंद्र नगर होते हुए भारत के विभिन्न राज्यों में पहुंचने लगे। रही-सही कसर दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही टैक्सियों ने पूरी कर दी। झूलाघाट से अब देहरादून और दिल्ली जाने वाली बस का ही संचालन होता है। रोडवेज बसों की दयनीय दशा होने के बावजूद यात्री इनमें ही सफर करने को प्राथमिकता देते हैं। लोगों का कहना है कि जिले के आंतरिक मार्गों पर रोडवेज को मिनी बसों का संचालन करना चाहिए। इससे रोडवेज की आय में भी वृद्धि होगी और लोगों का सफर भी सस्ता, सुलभ होगा।
कोट
वर्तमान में पिथौरागढ़ बसों की कमी है। नई बसों की मांग भेजी गई है। शासन से नई बसें मिलने पर जिन रूटों में यात्रियों की संख्या के हिसाब से जरूरत महसूस होगी उन रूटों में बसों का संचालन किया जाएगा। - रविशेखर कापड़ी, एआरएम पिथौरागढ़।