ट्रैक ऑफ द ईयर खलियाटॉप के तहत मंगलवार को दसवें दल ने ट्रैकिंग शुरू कर दी है, जबकि सातवां, आठवां और नवां दल इस समय ट्रैकिंग रूट पर है। हर दल को 30 किलोमीटर का सफर पूरा करना पड़ रहा है। इसके लिए चार स्थानों पर पड़ाव बनाए गए हैं। ट्रैकिंग दल में शामिल लोग जैवविविधता का अध्ययन भी कर रहे हैं। अब तक के अध्ययन से पता चला है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में जैवविविधता को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है। इसकी वजह यह है कि इन इलाकों में मानवीय हस्तक्षेप बहुत कम है। आग के खतरे भी इन इलाकों में कम रहते हैं।
दसवें दल में भी 30 ट्रैकर शामिल हैं। यह लोग पहले मर्तोलीथौड़ जाएंगे। वहां से रूरखान होते हुए भैंसियाथान फिर खलियाटॉप की तलहटी में पहुंच रहे हैं। इस ट्रैकिंग रूट का पिछले दिनों निर्माण किया गया है। ट्रैकरों का दल करीब 3500 मीटर की ऊंचाई को टच कर रहा है। खलियाटॉप में विभिन्न प्रकार के पक्षी और जीवजंतु मिलते हैं। इसके अलावा वहां पर विभिन्न प्रजातियों की वनस्पति मिलती है।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद, यूथ हॉस्टल ऑफ इंडिया और कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से आयोजित विशेष कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के लोग हिस्सा ले रहे हैं। केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि इस अभियान से ट्रैकिंग के नए आयाम खुलेंगे। यूथ हॉस्टल ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी युधिष्टर शर्मा ने कहा कि अभी ट्रैकिंग पर 16 दलों को और जाना है।