पिथौरागढ़। वनाग्नि के सीजन में इस वर्ष मौसम की मेहरबानी से सीमांत के जंगल कम धधके। हालांकि वनों में आग धधकी जरूर लेकिन इसमें चीड़ का पिरूल ही अधिक जला। कुछ जगहों पर आग की छिटपुट घटनाएं अभी भी देखी जा रही हैं।
सीमांत के जंगलों में वनाग्नि की 79 घटनाओं में 83.90 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा। घाटी वाले इलाकों में गर्मी अधिक बढ़ने से जंगल आग से धधकते रहे। अभी भी थल से बेड़ीनाग जाते समय कई स्थानों पर आग देखी जा रही है। पश्चिमी घनधुरा का जंगल तो कई दिन तक आग से धधकता रहा। आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग की ओर से 68 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें करीब 200 फायर वाचर तैनात किए गए हैं। जिले में 1600 वन पंचायतें हैं। इनमें से वनाग्नि की दृष्टि से 382 वन पंचायत अति संवेदनशील श्रेणी में हैं। आग बुझाने में अच्छा कार्य करने वाले फायर वाचर को सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष खंडीय बारिश होने से आग का विकराल रूप कम ही देखने को मिला। रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते वन विभाग ने भी राहत की सांस ली है। संवाद