हिमालयन ग्राम विकास समिति के साइंस आउटरीच प्रोग्राम में पहुंचे रमन मैगसेसे अवार्डी राजेंद्र सिंह का कहना है कि पानी के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर प्रयास करने होंगे। सूखे, बाढ़ की स्थितियां मानव की छेड़छाड़ से पैदा हो रही हैं। इससे बचने के लिए बगैर सीमेंट, कंकरीट के बांध बनने चाहिए।
उन्होंने कहा जितना पानी धरती के नीचे रिचार्ज होता है, उससे तीन गुना पानी डिस्चार्ज होता है। जल पुुरुष ने अपनी कर्मभूमि राजस्थान में पानी के संरक्षण के लिए हुए प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। कहा कि राजस्थान में पानी सीधे बादलों से बनता है। पानी का कोई अन्य स्रोत नहीं है।
भू विज्ञानी पद्मविभूषण प्रोफेसर केएस वल्दिया ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का पालन किए बिना मानव की प्रगति असंभव है। जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च बंगलूरू के प्रोफेसर उमेश बाघमरे ने विद्यार्थियों को प्रोटान और न्यूट्रान की जानकारी दी। प्रोफेसर उदय रंगा ने जीन तकनीक और बैक्टीरिया की उपयोगिता के बारे में बताया।
जीबी पंत विश्वविद्यालय पंतनगर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के टीएस महर ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बीजगणित के प्रयोगों के बारे में जानकारी दी। जीबी पंत विश्वविद्यालय पंतनगर के पूर्व प्रोफेसर बीडी लखचौरा ने कोशिका विभाजन, भ्रूण का विकास और शरीर की संरचना के बारे में बताया। जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंटिफिक रिसर्च बंगलूरू के वैज्ञानिक टी गोविंद राजू ने रंगों और रसायन के बारे में जानकारी दी। इससे पहले एचजीवीएस के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट ने स्वागत किया। कार्यक्रम में केंद्र सरकार के पूर्व सचिव कमलकांत जायसवाल, यूसर्क के डा. ओपी नौटियाल, प्रोफेसर केएस कठायत, प्रोफेसर गंगा बिष्ट, प्रोफेसर एएस जीना, डा. एनएस विद्याति राजा आदि महत्वपूर्ण हस्तियां मौजूद थीं। कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के 200 विद्यार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं।
पहुंचते हैं जानेमाने वैज्ञानिक
हिमालयन ग्राम विकास समिति के कार्यक्रम में हर साल देश के जानेमाने वैज्ञानिक पहुंचते हैं। देश के प्रख्यात वैज्ञानिक भारतरत्न चिंतामणि नागेशा रामचंद्र राव (सीएनआर राव), पद्मभूषण देश के विख्यात भूगर्भशास्त्री केएस वल्दिया और तमाम प्रतिष्ठित वैज्ञानिक साइंस आउटरीच प्रोग्राम में आते रहे हैं।